स्वास्थ्य

LiverHealth – हेपेटाइटिस के जोखिम को हल्के में न लें, जानें कब करानी चाहिए जांच…

LiverHealth– हेपेटाइटिस दुनियाभर में तेजी से बढ़ती ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जो सीधे लिवर को प्रभावित करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वायरल हेपेटाइटिस के कारण हर साल करीब 13 लाख लोगों की मौत होती है, जबकि लगभग 28.7 करोड़ लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस-बी संक्रमण के साथ जीवन जी रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई मामलों में शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे संक्रमण लंबे समय तक बिना पहचान के शरीर में बना रह सकता है।

किन लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है?

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लोगों में हेपेटाइटिस संक्रमण का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। इनमें अस्पतालों और लैब में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी, नियमित डायलिसिस कराने वाले मरीज, संक्रमित सुई का उपयोग करने वाले लोग, असुरक्षित यौन संबंध रखने वाले व्यक्ति और पहले से किसी लिवर रोग से पीड़ित मरीज शामिल हैं। इसके अलावा यदि किसी संक्रमित मां से बच्चे का जन्म होता है, तो ऐसे मामलों में भी चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक जांच की सलाह दी जाती है।

किन संकेतों पर तुरंत जांच करानी चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लक्षणों का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जिनमें संक्रमण का खतरा अधिक है। यदि लंबे समय तक थकान बनी रहे, बार-बार मतली महसूस हो, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो या त्वचा और आंखों में पीलापन दिखाई दे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। वहीं संक्रमित रक्त चढ़ने, असुरक्षित यौन संपर्क या संक्रमित सुई के संपर्क में आने के बाद भी समय पर जांच कराना जरूरी माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार हेपेटाइटिस-बी की स्क्रीनिंग कराई जाती है।

समय पर पहचान क्यों है जरूरी?

चिकित्सकों के अनुसार, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी संक्रमण लंबे समय तक बिना इलाज के रहने पर लिवर में फाइब्रोसिस, सिरोसिस और गंभीर मामलों में लिवर फेलियर या लिवर कैंसर जैसी जटिलताओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए जोखिम वाले लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्क्रीनिंग कराना महत्वपूर्ण माना जाता है। शुरुआती पहचान होने पर उपचार और निगरानी के जरिए गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध हैं। इसके साथ ही रोजमर्रा की कुछ सावधानियां संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं। हमेशा स्वच्छ या उबला हुआ पानी पीना, साफ और अच्छी तरह पका भोजन करना, नियमित रूप से हाथ धोना और रेजर या टूथब्रश जैसी निजी वस्तुएं किसी के साथ साझा न करना जरूरी है। सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाने और शराब के सेवन से दूरी बनाने की भी सलाह दी जाती है, क्योंकि यह लिवर को अतिरिक्त नुकसान पहुंचा सकती है।

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