Protest – जंतर मंतर प्रदर्शन में दंगारोधी कार्रवाई पर उठे सवाल, जांच जारी…
Protest – दिल्ली के जंतर मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अपनाए गए दंगारोधी उपाय अब जांच के दायरे में हैं। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों और सूत्रों के अनुसार, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने हालात को काबू में लाने के लिए विभिन्न प्रकार के कम जानलेवा दंगारोधी उपकरणों का इस्तेमाल किया था। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि सीआरपीएफ ने पूरे घटनाक्रम की आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

दंगारोधी उपकरणों के इस्तेमाल का विवरण
दिल्ली पुलिस के एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान भीड़ के उग्र होने पर आरएएफ ने 55 नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 इलेक्ट्रिकल शेल, पांच टीयर स्मोक ग्रेनेड तथा एंटी-रायट गन (ARG) के साथ प्लास्टिक पैलेट का इस्तेमाल किया। दस्तावेज में उल्लेख है कि यह कार्रवाई उस समय उत्तर जिला पुलिस उपायुक्त (North DCP) राजा भाटिया के निर्देश पर की गई थी, जब भीड़ को नियंत्रित करना आवश्यक समझा गया।
पैलेट गन को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
घटना के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए एक प्रदर्शनकारी का हवाला दिया, जिसके शरीर पर कथित तौर पर पैलेट के निशान बताए गए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसने पैलेट गन का उपयोग नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक, यदि इस तरह के उपकरण का इस्तेमाल हुआ है तो वह आरएएफ की ओर से किया गया था, जिसकी भूमिका दंगारोधी कार्रवाई तक सीमित रहती है।
दस्तावेज में क्या दर्ज है
सूत्रों के अनुसार, घटना के समय आरएएफ के डिप्टी कमांडेंट सतीश सांगवान बी-208 यूनिट का नेतृत्व कर रहे थे और जोन-1 में तैनात थे। बाद में उन्होंने ड्यूटी से संबंधित जानकारी कंट्रोल रूम में दर्ज कराई। रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उपलब्ध दंगारोधी संसाधनों का उपयोग संबंधित वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर किया गया। इनमें एंटी-रायट गन भी शामिल थी, जिसे कम जानलेवा हथियारों की श्रेणी में रखा जाता है और इसके उपयोग के लिए निर्धारित मानक प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है।
सीआरपीएफ कर रही है विस्तृत जांच
सीआरपीएफ ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि पैलेट आधारित दंगारोधी उपकरण किन परिस्थितियों में इस्तेमाल किए गए, उस समय मौके पर भीड़ की स्थिति क्या थी और क्या अन्य सभी विकल्प अपनाने के बाद ही यह कदम उठाया गया। जांच टीम घटना से जुड़े वीडियो फुटेज का विश्लेषण कर रही है और मौके पर मौजूद अधिकारियों एवं जवानों से भी पूछताछ की जाएगी।
नियमों के पालन पर रहेगा फोकस
जांच के दौरान यह भी परखा जाएगा कि दंगारोधी कार्रवाई के समय निर्धारित दिशा-निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। फिलहाल इस मामले में विभिन्न एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर तथ्यों का परीक्षण कर रही हैं।