Talks – जब सरकार और छात्र प्रतिनिधियों की वार्ता में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर बनी रही असहमति…
Talks – छात्र आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच हुई बातचीत में कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग सबसे बड़ा विवाद का विषय बनी रही। वार्ता से जुड़े सूत्रों के अनुसार, छात्र पक्ष के दोनों प्रतिनिधियों ने अपनी इस मांग पर कोई नरमी नहीं दिखाई और स्पष्ट किया कि जब तक इस पर निर्णय नहीं होता, तब तक किसी व्यापक सहमति की संभावना सीमित रहेगी।

दूसरी बैठक में भी कायम रहा वही रुख
सूत्रों के मुताबिक, सरकार को 24 जुलाई को हुई बैठक से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद थी। इससे पहले 20 जुलाई को पहली वार्ता के बाद विभिन्न स्तरों पर संवाद की कोशिशें की गई थीं और आंदोलन से जुड़े प्रमुख लोगों तक भी संपर्क स्थापित किया गया था। हालांकि दूसरी बैठक में छात्र प्रतिनिधियों ने दोहराया कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उनकी प्राथमिक मांग है और इस मुद्दे पर कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।
कुछ विषयों पर दिखी सहमति
वार्ता के दौरान केवल मतभेद ही नहीं, बल्कि कुछ मुद्दों पर सकारात्मक संकेत भी मिले। आंतरिक सुरक्षा और आंदोलन के दौरान असामाजिक तत्वों की कथित घुसपैठ पर छात्र प्रतिनिधियों ने सख्त कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे तत्वों के खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाए जाते हैं तो उनकी ओर से कोई आपत्ति नहीं होगी। बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त समिति के गठन के सुझाव पर भी चर्चा हुई और बाद में इस मुद्दे पर अधिक जोर नहीं दिया गया।
सरकार ने उठाए गए कदमों की दी जानकारी
बैठक के दौरान सरकार की ओर से हाल में की गई प्रशासनिक कार्रवाइयों की जानकारी भी साझा की गई। सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधियों को बताया गया कि उच्च शिक्षा सचिव को उनके पद से हटाया गया है और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े 47 अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। सरकार का मानना था कि इन कदमों से व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने का संदेश जाएगा।
छात्र प्रतिनिधियों ने दोहराई मुख्य मांग
सरकारी पक्ष की जानकारी सुनने के बाद भी छात्र प्रतिनिधियों ने अपना रुख नहीं बदला। उनका कहना था कि प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन आंदोलन की मूल मांग शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस मांग पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अन्य कदम उनकी प्रमुख चिंता का समाधान नहीं माने जाएंगे।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर भी हुई चर्चा
वार्ता के दौरान प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई का मुद्दा भी उठा। सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद छात्र प्रतिनिधियों ने यह आग्रह भी रखा कि यह भरोसा केवल दिल्ली तक सीमित न रहे, बल्कि भाजपा शासित राज्यों में आंदोलन से जुड़े प्रतिभागियों पर भी इसी तरह का रुख अपनाया जाए। इस विषय पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई, हालांकि अंतिम सहमति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।