Accident – हल्द्वानी सड़क हादसे ने चार परिवारों से छीने सपने, घरों में पसरा मातम…
Accident- हल्द्वानी के गौलापार-तीनपानी बाईपास पर हुए भीषण सड़क हादसे ने चार परिवारों की जिंदगी बदल दी। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की टक्कर में जान गंवाने वाले युवाओं के घरों में अब केवल शोक और अनिश्चितता का माहौल है। कोई अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था तो कोई माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा। हादसे के बाद परिजनों के सामने आर्थिक और भावनात्मक दोनों तरह का संकट खड़ा हो गया है।

परिवार का इकलौता सहारा था अंशु
हादसे में जान गंवाने वाला अंशु आर्या अपने परिवार का एकमात्र बेटा था। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था और वह एक फैक्टरी में नौकरी कर घर की जिम्मेदारी संभाल रहा था। परिवार में उसकी बुजुर्ग मां और एक अविवाहित बहन हैं। अंशु के जीजा ने बताया कि कुछ समय पहले ही छोटी बहन की शादी हुई थी, जिसके कारण परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ गया था। अंशु भरोसा दिलाता था कि वह धीरे-धीरे सारी किस्तें चुका देगा, लेकिन हादसे ने परिवार की सारी उम्मीदें तोड़ दीं।
मां की उम्मीदें पलभर में बिखर गईं
बेटे की मौत की खबर मिलते ही अंशु की मां बेसुध हो गईं। होश आने पर वह लगातार बेटे के बारे में पूछती रहीं। पड़ोसियों के अनुसार अंशु स्वभाव से मिलनसार था और हमेशा अपनी मां को आराम देने की बात करता था। अब उसी मां के सामने बेटे के बिछड़ने का दुख और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां दोनों एक साथ आ खड़ी हुई हैं।
तीन दोस्तों के घरों में भी पसरा सन्नाटा
हादसे में जान गंवाने वाले राहुल, अंशु और शिवम एक ही फैक्टरी में काम करते थे और अपने-अपने परिवारों की आजीविका का सहारा बने हुए थे। वहीं आदित्य पढ़ाई कर भविष्य संवारने का सपना देख रहा था। चारों युवाओं की असमय मौत से उनके परिवार गहरे सदमे में हैं और हर घर में मातम का माहौल है।
अधूरे रह गए परिवारों के सपने
राहुल अपने परिवार का सबसे छोटा बेटा था और बहनों की शादी की जिम्मेदारी निभाने का सपना देख रहा था। उसके बड़े भाई ने बताया कि राहुल हमेशा परिवार के साथ मिलकर भविष्य संवारने की बातें करता था। दूसरी ओर शिवम भी अपने माता-पिता को मजदूरी से राहत दिलाने की योजना बना रहा था। उसके भाई के मुताबिक शिवम चाहता था कि जल्द ही माता-पिता को काम छोड़कर आराम करने का अवसर मिले, लेकिन यह सपना भी अधूरा रह गया।
आदित्य की पढ़ाई भी बीच में छूटी
हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य के पिता लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। परिवार ने उसे बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए अच्छे विद्यालय में दाखिला दिलाया था और वह 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा था। परिजनों को उम्मीद थी कि वह पढ़-लिखकर परिवार का नाम रोशन करेगा, लेकिन एक सड़क हादसे ने उनकी सभी उम्मीदों पर विराम लगा दिया। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और ग्रामीण परिवार के साथ मौजूद रहे तथा शोक संवेदना व्यक्त की।