उत्तर प्रदेश

UP RERA – सोसायटी मेंटेनेंस फंड पर नए नियम, फ्लैट खरीदारों को मिलेगी राहत

UP RERA – उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने आवासीय सोसायटियों के रखरखाव से जुड़े विवादों को कम करने के लिए मेंटेनेंस सुरक्षा निधि (IFMS) के प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। अब बिल्डरों को खरीदारों से ली गई यह राशि अलग बैंक खाते में सुरक्षित रखनी होगी। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के गठन के बाद पूरी रकम, उस पर अर्जित ब्याज सहित, संबंधित संस्था को सौंपना अनिवार्य होगा।

IFMS के उपयोग की प्रक्रिया हुई स्पष्ट

UP RERA ने अपने सामान्य विनियमों में संशोधन करते हुए IFMS के संग्रह, संरक्षण और हस्तांतरण की प्रक्रिया तय कर दी है। यह एकमुश्त राशि फ्लैट का कब्जा या रजिस्ट्री मिलने के समय खरीदार से ली जाती है। यह नियमित मासिक मेंटेनेंस शुल्क से अलग होती है और इसका उद्देश्य सोसायटी की बड़ी मरम्मत एवं पूंजीगत कार्यों के लिए वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

किन कार्यों में खर्च होगी निधि

नई व्यवस्था के अनुसार, इस निधि का उपयोग लिफ्ट बदलने, मोटर की मरम्मत, पंप, विद्युत प्रणाली, बाहरी रंग-रोगन और अन्य साझा सुविधाओं के रखरखाव जैसे कार्यों में किया जाएगा। ऐसे खर्च सामान्य मासिक मेंटेनेंस शुल्क से पूरे नहीं हो पाते, इसलिए अलग सुरक्षा निधि का प्रावधान किया गया है। अब इस राशि का उपयोग किसी अन्य परियोजना या बिल्डर के व्यावसायिक खर्चों में नहीं किया जा सकेगा।

बिल्डरों की जवाबदेही होगी तय

नए नियमों के तहत बिल्डर को IFMS की पूरी राशि निर्धारित बैंक खाते में जमा रखनी होगी। जैसे ही RWA या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का गठन होगा, बिल्डर को पूरी राशि और उस पर अर्जित ब्याज संबंधित संस्था को हस्तांतरित करना होगा। इसके बाद सोसायटी के रखरखाव कोष का संचालन संबंधित एसोसिएशन करेगी और बिल्डर की भूमिका समाप्त हो जाएगी।

खरीदारों को मिलेगा सीधा लाभ

UP RERA के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी के अनुसार, कई परियोजनाओं में देखा गया कि बिल्डर खरीदारों से IFMS वसूलने के बावजूद RWA बनने के बाद भी पूरी राशि हस्तांतरित नहीं करते थे। इससे रखरखाव कार्य प्रभावित होते थे और निवासियों को अतिरिक्त आर्थिक योगदान देना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, रखरखाव कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध रहेगा और घर खरीदारों के हित बेहतर तरीके से सुरक्षित होंगे।

स्वैच्छिक पंजीकरण की ओर बढ़ रहा रुझान

UP RERA ने यह भी बताया कि प्रदेश में कई ऐसी आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं, जिन पर कानूनी रूप से RERA पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, वे भी स्वैच्छिक पंजीकरण करा रही हैं। प्राधिकरण के अनुसार, इससे खरीदारों का भरोसा बढ़ता है, बैंकों से Home Loan मिलने में सुविधा होती है और परियोजनाओं का बाजार मूल्य भी बेहतर मिलता है।

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