JPNIC – लखनऊ के जेपीएनआईसी का संचालन 30 वर्ष के लिए ठेके पर देने की तैयारी
JPNIC – लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने गोमती नगर स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय सेंटर (जेपीएनआईसी) के संचालन को दोबारा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने इस परियोजना के संचालन और रखरखाव के लिए ग्लोबल टेंडर जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्ताव के अनुसार, चयनित एजेंसी परिसर का संचालन संभालने के साथ-साथ आवश्यक मरम्मत कार्य भी अपने खर्च पर कराएगी।

30 वर्षों के लिए दिया जाएगा संचालन अधिकार
एलडीए की योजना के अनुसार, जेपीएनआईसी का संचालन 30 वर्ष की अवधि के लिए निजी एजेंसी को सौंपा जाएगा। इसके बदले संबंधित कंपनी प्राधिकरण को तय शर्तों के अनुसार निर्धारित राशि का भुगतान करेगी। इस मॉडल का उद्देश्य परिसर को दोबारा सक्रिय करना और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी पेशेवर तरीके से सुनिश्चित करना है।
वर्षों से अधूरी पड़ी है परियोजना
गोमती नगर में एलडीए कार्यालय के पास लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए गए जेपीएनआईसी का निर्माण वर्ष 2013 में शुरू हुआ था। हालांकि वर्ष 2017 में परियोजना पूरी होने से पहले ही निर्माण कार्य रोक दिया गया। उस समय तक करीब 850 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे, जबकि फिनिशिंग और अन्य शेष कार्यों के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये का काम बाकी था।
जांच के कारण रुका था निर्माण कार्य
परियोजना को पूरा करने के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद वर्ष 2017 में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू होने के बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। जांच प्रक्रिया के चलते यह महत्वाकांक्षी परियोजना लंबे समय तक अधूरी रही। अब एलडीए इसे उपयोग में लाने के लिए नए संचालन मॉडल पर काम कर रहा है, ताकि भवन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
शासन की मंजूरी के बाद जारी होगा टेंडर
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, इस संबंध में आवश्यक बैठकें पूरी हो चुकी हैं। अब शासन से अंतिम अनुमति मिलने के बाद ग्लोबल टेंडर जारी किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को संचालन, रखरखाव और शेष मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
परिसर को फिर से सक्रिय बनाने की योजना
एलडीए का मानना है कि निजी भागीदारी के माध्यम से जेपीएनआईसी का संचालन शुरू होने से लंबे समय से बंद पड़ी इस परियोजना का उपयोग बढ़ेगा। साथ ही भवन के रखरखाव और सुविधाओं के विकास में भी तेजी आएगी। प्राधिकरण को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से परिसर का प्रभावी संचालन सुनिश्चित होगा और यह सार्वजनिक उपयोग के लिए फिर से सक्रिय हो सकेगा।