ChildVision – घर पर ऐसे पहचानें बच्चे की नजर कमजोर तो नहीं हो रही…
ChildVision – बच्चों की आंखें उनके शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कई बार छोटे बच्चे यह समझ नहीं पाते कि उन्हें साफ दिखाई नहीं दे रहा है या उनकी नजर पहले जैसी नहीं रही। ऐसे में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चे की रोजमर्रा की आदतों और व्यवहार पर ध्यान दें। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ आसान घरेलू तरीकों से शुरुआती स्तर पर आंखों की समस्या के संकेत पहचाने जा सकते हैं। हालांकि, ये तरीके केवल प्रारंभिक पहचान के लिए हैं और किसी भी संदेह की स्थिति में नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक है।

दूर की चीजें पढ़ने में हो रही है परेशानी?
बच्चे को थोड़ी दूरी पर लगे कैलेंडर, पोस्टर या किसी बोर्ड पर लिखे बड़े अक्षर पढ़ने के लिए कहें। यदि वह बार-बार आंखें सिकोड़कर देखने की कोशिश करता है, पास जाकर पढ़ना चाहता है या सही शब्द पहचानने में कठिनाई महसूस करता है, तो यह दृष्टि कमजोर होने का शुरुआती संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण बार-बार दिखाई दें तो आंखों की जांच कराने में देर नहीं करनी चाहिए।
एक-एक आंख से देखने की करें जांच
घर पर एक आसान परीक्षण यह भी है कि बच्चे की एक आंख को हल्के से ढककर दूसरी आंख से किसी वस्तु को देखने के लिए कहें। इसके बाद यही प्रक्रिया दूसरी आंख के साथ दोहराएं। यदि किसी एक आंख से देखने में ज्यादा कठिनाई महसूस हो या बच्चा असहज लगे, तो यह दृष्टि संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।
रोजमर्रा की आदतों पर रखें नजर
यदि बच्चा टीवी बहुत करीब बैठकर देखता है, मोबाइल को आंखों के बेहद पास रखता है या बार-बार आंखें मलता और मिचमिचाता है, तो इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बिना किसी एलर्जी के बार-बार आंखें रगड़ना या लगातार पलकें झपकाना भी आंखों पर पड़ रहे तनाव या नजर की समस्या की ओर इशारा कर सकता है। बच्चों में ऐसी आदतें लंबे समय तक बनी रहें तो उनकी जांच कराना उचित होता है।
पढ़ाई के दौरान दिखें ये लक्षण तो रहें सतर्क
पढ़ते समय सिरदर्द होना, जल्दी थक जाना, किताब पर ध्यान केंद्रित न कर पाना या स्कूल में ब्लैकबोर्ड साफ न दिखाई देना भी कमजोर नजर का संकेत हो सकता है। यदि बच्चा धुंधला दिखने की शिकायत करे, आंखों में लगातार पानी आए, लालपन बना रहे या एक आंख का संतुलन सामान्य न लगे, तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से अधिकांश दृष्टि संबंधी समस्याओं का प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है और बच्चे की पढ़ाई व दैनिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकता है।