झारखण्ड

CoalNews – धनबाद में कथित अवैध कोयला कारोबार पर ईडी की जांच तेज, खंगाले गए कई वित्तीय रिकॉर्ड

CoalNews – झारखंड के धनबाद में कथित अवैध कोयला कारोबार और उससे जुड़े संभावित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एजेंसी बीते कई दिनों से कोयला कारोबारी एल.बी. सिंह और उनसे जुड़े लोगों के विभिन्न परिसरों की जांच कर रही है। इस दौरान वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

कई स्थानों पर तलाशी, नकदी और निवेश रिकॉर्ड मिले

जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई को ईडी ने धनबाद में एक साथ 28 से अधिक ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इसके बाद भी जांच की प्रक्रिया जारी है। कार्रवाई के दौरान लगभग 1.02 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। साथ ही बड़ी संख्या में वित्तीय दस्तावेज और निवेश संबंधी रिकॉर्ड एजेंसी के कब्जे में आए हैं। जांच के क्रम में एल.बी. सिंह से जुड़े करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को भी फ्रीज किया गया है। एजेंसी इन निवेशों के स्रोत और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

इन लोगों से जुड़े परिसरों की हुई जांच

ईडी की कार्रवाई जिन लोगों से जुड़े परिसरों तक पहुंची है, उनमें एल.बी. सिंह, अनिल गोयल, हरेंद्र चौहान, अनूप चौहान, गणेश यादव, पप्पू मंडल और रोहित यादव के नाम शामिल हैं। हालांकि, जांच एजेंसी ने अब तक किसी भी व्यक्ति को इस मामले में दोषी नहीं ठहराया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

जीएसटी चोरी और दस्तावेजों के उपयोग की जांच

जांच में कथित तौर पर जीएसटी चोरी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोयला कारोबार संचालित किए जाने की आशंका की भी पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ कारोबारी पश्चिम बंगाल से केवल कोयले से संबंधित दस्तावेज खरीदते थे, जबकि वास्तविक कोयला धनबाद और आसपास के क्षेत्रों से कथित रूप से जुटाकर हार्ड कोक इकाइयों तक पहुंचाया जाता था। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यदि पश्चिम बंगाल से वास्तविक आपूर्ति नहीं हुई, तो संबंधित दस्तावेजों का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।

परिवहन नेटवर्क और पुराने इनपुट भी जांच के दायरे में

अधिकारियों के अनुसार, रेलवे रैक और ट्रकों के माध्यम से कथित रूप से कोयले की ढुलाई कैसे हुई और इस पूरी व्यवस्था में किन लोगों की भूमिका रही, इसकी भी जांच की जा रही है। ईडी का फोकस कोयला चोरी, फर्जी बिलिंग, जीएसटी चोरी और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग के बीच संबंधों को समझने पर है। जानकारों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क की शिकायत पहले पुलिस मुख्यालय तक भी पहुंची थी और प्रारंभिक स्तर पर जांच शुरू हुई थी, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सकी। अब ईडी की मौजूदा कार्रवाई के बाद मामले के विभिन्न पहलुओं से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल एजेंसी की जांच जारी है।

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