TeacherRecruitment – विशेष TET की तैयारी शुरू, 69000 भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
TeacherRecruitment– सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) आयोजित कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में शासन ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम उन शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जो न्यायालय के आदेश से प्रभावित हो रहे हैं।

बड़ी संख्या में शिक्षक होंगे प्रभावित
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश में प्राथमिक स्तर के 64,062, उच्च प्राथमिक स्तर के 76,256 और लगभग 2,500 विशेष शिक्षक इस निर्णय के दायरे में आते हैं। कुल मिलाकर करीब 1.42 लाख से अधिक शिक्षकों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि इन शिक्षकों के लिए विशेष TET आयोजित कर आवश्यक पात्रता सुनिश्चित की जाएगी।
चयन आयोग से मांगी गई कार्ययोजना
विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी द्वारा शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजे गए पत्र में परीक्षा आयोजन की रूपरेखा जल्द तैयार करने को कहा गया है। शासन चाहता है कि परीक्षा की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो, ताकि प्रभावित शिक्षकों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे को लेकर विभिन्न राज्यों के शिक्षक संगठन लगातार अपनी मांगें उठाते रहे हैं और संसद के मानसून सत्र में भी इस विषय पर चर्चा की मांग की जा रही है।
दंपती शिक्षकों को आवेदन के लिए अतिरिक्त समय
इसी बीच परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों से जुड़े मामले में भी राहत दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के निर्देशों के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने दंपती शिक्षकों के आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 5 अगस्त कर दी है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विभागीय पोर्टल पर संशोधित सूचना जारी कर सभी जिलों के शिक्षकों को इसकी जानकारी दी जाए। बताया गया है कि प्रक्रिया को लेकर बनी कुछ भ्रम की स्थिति के कारण कई पात्र शिक्षक समय पर आवेदन नहीं कर सके थे।
69000 शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े विवाद पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत लगभग 8,270 अभ्यर्थियों की सूची को अंतिम मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वर्ष 2020 से अब तक की पूरी घटनाक्रम रिपोर्ट लिखित रूप में प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है।
संशोधित कटऑफ और सूची पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने संशोधित कटऑफ अंक अदालत के समक्ष रखे। सरकार के अनुसार पुनर्गणना के बाद अनारक्षित वर्ग की कटऑफ 69.42, ओबीसी की 65.92, एससी की 60.14 और एसटी की 56.09 रही है। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस सूची और सरकार के हलफनामे पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जब तक पूरी चयन सूची, अभ्यर्थियों के प्राप्तांक, श्रेणी और उपश्रेणी सहित सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक आरक्षण संबंधी वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती। कुछ अभ्यर्थियों के नाम सूची में शामिल किए जाने को लेकर भी अदालत के समक्ष सवाल उठाए गए।