SupremeCourt – कई अहम मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीखें तय…
SupremeCourt– सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई, जिनमें देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, दलबदल विरोधी कानून की व्याख्या और ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व इंजीनियर से जुड़े मामले शामिल रहे। अदालत ने अलग-अलग मामलों में प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित पक्षों को आवश्यक निर्देश दिए और आगामी सुनवाई की तारीखें भी निर्धारित कीं।

पुलिस थानों में सीसीटीवी व्यवस्था पर अदालत ने जताया संतोष
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी सिद्धार्थ दवे ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में राज्यों और संबंधित एजेंसियों ने इस दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। पीठ ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मामले में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
रखरखाव और वित्तीय सहायता पर मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान अदालत ने दो प्रमुख पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया। पहला, सीसीटीवी परियोजना के लिए वित्तीय सहायता की अवधि बढ़ाने की आवश्यकता और दूसरा, पहले से लगाए जा चुके कैमरों के नियमित रखरखाव की व्यवस्था। केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित कानून अधिकारी ने कहा कि इन दोनों विषयों पर संबंधित विभागों से निर्देश प्राप्त कर अदालत को जानकारी दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए दो सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई 5 अगस्त तय की है।
दलबदल कानून की व्याख्या पर 27 जुलाई को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है, जिसमें संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा-4 की व्याख्या पर पुनर्विचार की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई 27 जुलाई को करेगी। सिब्बल ने अदालत से कहा कि उन्होंने यह याचिका व्यक्तिगत क्षमता में दाखिल की है और इसका संबंध संसद तथा विधानसभाओं में दल परिवर्तन से जुड़े संवैधानिक प्रश्नों से है।
क्या है दसवीं अनुसूची के पैरा-4 का प्रावधान?
संविधान की दसवीं अनुसूची का पैरा-4 राजनीतिक दलों के विलय से जुड़ी परिस्थितियों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को दलबदल कानून के तहत अयोग्यता से छूट देने का प्रावधान करता है। याचिका में दलील दी गई है कि इस प्रावधान की मौजूदा व्याख्या का कुछ मामलों में ऐसा उपयोग किया जा रहा है, जिससे दलबदल विरोधी कानून के मूल उद्देश्य पर असर पड़ सकता है। अदालत इस विषय से जुड़े लंबित मामलों के संदर्भ में भी सुनवाई करेगी।
ब्रह्मोस इंजीनियर मामले की सुनवाई अगस्त में
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व इंजीनियर निशांत अग्रवाल को बरी किए जाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश एटीएस की याचिका पर सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की है। यह मामला आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत दर्ज आरोपों से संबंधित है।
पहले भी चर्चा में रहा है मामला
निशांत अग्रवाल को वर्ष 2023 में जमानत मिली थी। इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इससे पहले नागपुर की एक जिला अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। अब शीर्ष अदालत इस पूरे मामले की कानूनी समीक्षा करेगी।