उत्तर प्रदेश

PoliticsUpdate – महिला आरक्षण बहस में सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

PoliticsUpdate – उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया। अपने संबोधन की शुरुआत में ही उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की नीतियों और पिछले रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर इन दलों का रवैया पहले भी स्पष्ट रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना रहा है, लेकिन इन पहलों का भी विरोध किया गया।

योजनाओं के जरिए महिला सशक्तिकरण पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में विभिन्न सरकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के नाम बैंक खाते खोलने जैसी पहल ने कठिन समय में सीधे सहायता पहुंचाने का काम किया। उन्होंने कोविड काल का उदाहरण देते हुए कहा कि इन खातों के जरिए बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक मदद दी गई।

इसके अलावा, उन्होंने घर-घर शौचालय निर्माण को महिलाओं की गरिमा से जोड़ते हुए बताया कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान से जुड़ा कदम था। उनके अनुसार, ऐसी योजनाओं ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाया है।

विपक्ष के रुख पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि अब जब महिला आरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है, तो वही दल इसे लेकर नए सिरे से मांग कर रहे हैं, जिन्होंने पहले इन पहलों को गंभीरता से नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी और वास्तविक कार्यों के बीच अंतर को जनता समझती है। साथ ही, उन्होंने विपक्ष से अपने पुराने रुख पर आत्ममंथन करने की बात भी कही।

आर्थिक भागीदारी बढ़ने का दावा

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार के कारण महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी बढ़ी है। इसका सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है, जहां विकास दर में वृद्धि देखने को मिली है।

उन्होंने स्टार्टअप और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई प्रयास किए गए हैं।

राजनीतिक घटनाओं का भी हुआ उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कुछ पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया और विपक्षी दलों के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को देखते हुए आज के दावों और बयानों की तुलना करना जरूरी है।

साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है।

आरक्षण की मांग पर प्रतिक्रिया

महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा है, तो उसे अपने आचरण पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने संसद और अन्य मंचों पर किए गए व्यवहार का जिक्र करते हुए विपक्ष से आत्ममंथन की अपील की।

विधानसभा के इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण का मुद्दा प्रमुख रहा, लेकिन इस पर राजनीतिक मतभेद भी साफ तौर पर सामने आए। आने वाले समय में इस विषय पर और चर्चा होने की संभावना है।

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