EducationTech – एकेटीयू की डिजिटल परीक्षा प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता और बचत
EducationTech – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई गई डिजिटल परीक्षा प्रणाली अब अन्य राज्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक मॉडल के रूप में सामने आ रही है। इस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समय की बचत करने वाला बताया जा रहा है। राजभवन ने भी इस प्रणाली को प्रभावी मानते हुए राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों को इसे अपनाने का सुझाव दिया है।

नई व्यवस्था के तहत परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे छात्रों की पहचान से लेकर मूल्यांकन तक हर चरण को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सके।
बायोमीट्रिक और डिजिटल सत्यापन से फर्जीवाड़े पर रोक
इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें छात्रों की पहचान के लिए बायोमीट्रिक और डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाता है। पहले जहां परीक्षा केंद्रों पर फोटो और हस्ताक्षर के आधार पर सत्यापन होता था, वहीं अब यह प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी हो गई है।
परीक्षा के दौरान छात्रों की उपस्थिति बायोमीट्रिक तरीके से दर्ज की जाती है और उनकी फोटो भी ली जाती है। इसके साथ ही उत्तर पुस्तिका को स्कैन किया जाता है, जिससे तीन स्तर पर जांच संभव हो पाती है। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या पहचान में भ्रम की संभावना काफी कम हो जाती है।
क्यूआर कोड से जुड़ी कॉपियां और सुरक्षित मूल्यांकन
डिजिटल व्यवस्था में हर उत्तर पुस्तिका पर एक क्यूआर कोड होता है, जो उसकी पहचान से जुड़ा होता है। यह कोड कॉपी नंबर के रूप में काम करता है और इसे आसानी से बदला नहीं जा सकता।
जब छात्र अपनी कॉपी जमा करता है, तो उसकी स्कैनिंग के दौरान फोटो, बायोमीट्रिक और क्यूआर कोड का मिलान किया जाता है। इससे कॉपियों के बदलने या गलत तरीके से हस्तक्षेप की संभावना खत्म हो जाती है।
यह प्रणाली उन स्थितियों में भी मददगार साबित होती है, जब छात्र अपनी कॉपी पर गलत विवरण दर्ज कर देता है। ऐसे मामलों में भी डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर सही पहचान सुनिश्चित की जा सकती है।
सीसीटीवी निगरानी से परीक्षा प्रक्रिया पर नजर
परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए सीसीटीवी का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। छात्रों के प्रवेश से लेकर परीक्षा के दौरान तक हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।
विश्वविद्यालय के कंट्रोल रूम से लाइव मॉनीटरिंग के जरिए पूरे सिस्टम पर नजर रखी जाती है। इससे न केवल अनुशासन बना रहता है, बल्कि किसी भी अनियमितता की स्थिति में तुरंत कार्रवाई भी संभव हो पाती है।
खर्च में कमी और संसाधनों की बचत
इस डिजिटल प्रणाली का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे खर्च में उल्लेखनीय कमी आती है। पेपर की छपाई सीमित हो जाती है और छोटे आकार के पन्नों का उपयोग किया जाता है, जिससे कागज की बचत होती है।
जानकारी के अनुसार, पहले जहां परीक्षा से जुड़ी छपाई पर काफी खर्च होता था, वहीं अब यह लागत काफी कम हो गई है। इससे विश्वविद्यालयों के संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो पा रहा है।
मूल्यांकन प्रक्रिया में तेजी और सुविधा
डिजिटल मूल्यांकन से परिणाम घोषित करने में भी तेजी आती है। उत्तर पुस्तिकाओं के खोने या बदलने की समस्या लगभग समाप्त हो जाती है।
इसके अलावा, कॉपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है। रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना भी आसान हो जाता है।
अन्य विश्वविद्यालयों के लिए बना उदाहरण
राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए यह प्रणाली एक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।
तकनीक के उपयोग से शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे छात्रों और संस्थानों दोनों को लाभ मिलने की संभावना है।