HealthAlert – पानी में एनडीएमए से बच्चों में बढ़ा कैंसर का खतरा
HealthAlert – पानी में मौजूद एक रासायनिक तत्व एनडीएमए को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। हालिया अध्ययन में सामने आया है कि यह तत्व वयस्कों की तुलना में बच्चों के लिए कहीं अधिक नुकसानदेह हो सकता है। शोध के अनुसार, यह रसायन बच्चों के शरीर में तेजी से बढ़ रही कोशिकाओं पर असर डालकर डीएनए को नुकसान पहुंचाता है, जिससे लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

एनडीएमए एक ऐसा प्रदूषक है जो आमतौर पर औद्योगिक प्रक्रियाओं के दौरान बनता है और कई बार पेयजल में भी पहुंच जाता है। इसके अलावा यह सिगरेट के धुएं, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और कुछ दवाओं में भी पाया जा चुका है।
बच्चों पर ज्यादा असर क्यों पड़ता है
वैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों का शरीर लगातार विकास की अवस्था में होता है, जहां कोशिकाएं तेजी से विभाजित होती रहती हैं। इसी वजह से जब एनडीएमए जैसे तत्व शरीर में प्रवेश करते हैं, तो उनका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब यह रसायन डीएनए को नुकसान पहुंचाता है, तो तेजी से विभाजित होती कोशिकाएं उस नुकसान को और बढ़ा देती हैं। यही प्रक्रिया आगे चलकर कैंसर से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है।
शोध में क्या सामने आया
इस विषय पर किए गए एक अध्ययन में अलग-अलग उम्र के जीवों पर इसका प्रभाव देखा गया। शोधकर्ताओं ने कम उम्र और वयस्क समूहों की तुलना करते हुए पाया कि कम उम्र वाले समूह में डीएनए क्षति और ट्यूमर बनने की संभावना अधिक थी।
अध्ययन के दौरान कुछ समय तक नियंत्रित मात्रा में इस रसायन के संपर्क में रखने पर युवा समूह में नकारात्मक प्रभाव अधिक तेजी से विकसित हुआ। इससे यह संकेत मिलता है कि शुरुआती उम्र में इस तरह के प्रदूषकों के संपर्क में आना ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है।
गर्भावस्था और बचपन में बढ़ सकता है खतरा
शोध से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गर्भावस्था या शुरुआती बचपन में इस रसायन का संपर्क होता है, तो इसका असर लंबे समय तक रह सकता है। इस दौरान शरीर के महत्वपूर्ण अंग विकसित हो रहे होते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि इस विषय पर अभी और गहन अध्ययन की जरूरत है, ताकि इसके प्रभावों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
आम जीवन में कहां पाया जाता है यह तत्व
एनडीएमए केवल पानी तक सीमित नहीं है। यह कई अन्य स्रोतों में भी पाया जा सकता है, जैसे कि तंबाकू उत्पाद, कुछ प्रकार के प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ और कुछ दवाएं।
इस वजह से विशेषज्ञ लोगों को जागरूक रहने की सलाह देते हैं और साफ-सुथरे पेयजल के उपयोग पर जोर देते हैं।
सतर्कता और आगे की दिशा
हालांकि इस अध्ययन ने एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले और शोध की जरूरत है।
इसके बावजूद, यह स्पष्ट है कि बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पर्यावरण में मौजूद ऐसे रसायनों पर नजर रखना जरूरी है। सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ वातावरण इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।