MayawatiStatement – ईद-उल-अजहा पर मायावती ने दिया भाईचारे और समानता का संदेश
MayawatiStatement – बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर देशवासियों, खासकर मुस्लिम समुदाय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व त्याग, मानवता और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने का अवसर है। मायावती ने लोगों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और सभी धर्मों का सम्मान करने की अपील की।

त्योहारों को जोड़ने वाली परंपरा बताया
मायावती ने अपने बयान में कहा कि ईद-उल-अजहा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि समाज में इंसानियत और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने वाला अवसर भी है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और साझा संस्कृति से है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर खुशियां बांटते हैं।
उन्होंने कहा कि देश की सामाजिक एकता को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी समुदायों के बीच विश्वास और सम्मान जरूरी है। त्योहार इसी भावना को आगे बढ़ाने का काम करते हैं और समाज में सकारात्मक माहौल तैयार करते हैं।
बसपा शासनकाल का किया उल्लेख
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में अपने शासनकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब बहुजन समाज पार्टी की सरकार रही, तब प्रदेश में कानून व्यवस्था, सामाजिक संतुलन और सभी वर्गों के सम्मान को प्राथमिकता दी गई थी। उनके अनुसार उस समय लोगों के बीच सुरक्षा और शांति का माहौल देखने को मिलता था।
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी आज भी ऐसी व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें हर समाज और हर वर्ग को बराबरी का अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में विकास तभी संभव है जब समाज में आपसी विश्वास और सद्भाव कायम रहे।
विभाजनकारी राजनीति पर जताई चिंता
अपने संदेश में मायावती ने मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज को धर्म और जाति के आधार पर बांटने वाली राजनीति देश की एकता के लिए सही नहीं है। उन्होंने लोगों से ऐसी विचारधाराओं से दूर रहने और संविधान में बताए गए समानता और भाईचारे के मूल्यों को अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी एकजुटता में है और लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब सभी नागरिकों को बराबरी और सम्मान का अधिकार मिलेगा। उनके अनुसार किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ भेदभाव समाज में तनाव पैदा करता है, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित होता है।
संविधान और समान अधिकारों पर जोर
बसपा प्रमुख ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान देश के हर नागरिक को समान अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके धर्म या जाति से नहीं, बल्कि उसके अधिकारों और नागरिकता से होनी चाहिए।
मायावती ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से मेलजोल और साझा विरासत की रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ईद, दिवाली, होली और अन्य त्योहारों को मिलजुल कर मनाने की परंपरा को और मजबूत किया जाए ताकि देश में भाईचारा और सामाजिक सद्भाव बना रहे।