उत्तर प्रदेश

GovernmentCollege – नए राजकीय महाविद्यालय में कम नामांकन, सामने आईं कई चुनौतियां

GovernmentCollege – उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए स्थापित नए राजकीय महाविद्यालयों में अपेक्षित छात्र संख्या नहीं पहुंच पा रही है। सीतापुर जिले के मिश्रिख क्षेत्र में स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय भी इसी स्थिति से गुजर रहा है, जहां सुविधाएं होने के बावजूद छात्राओं की संख्या बेहद सीमित है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस संस्थान में फिलहाल गिनती के छात्र ही पढ़ाई कर रहे हैं।

पहले सत्र में बेहद कम प्रवेश

करीब 8.74 करोड़ रुपये की लागत से बने इस महाविद्यालय में वर्ष 2025 से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हुईं। प्राचार्य और शिक्षकों की नियुक्ति के बाद बीए, बीएससी और बीकॉम पाठ्यक्रमों में दाखिले शुरू किए गए। हालांकि, पहले ही साल कुल 15 छात्राओं ने प्रवेश लिया। इनमें से 14 छात्राएं बीए में और एक बीएससी में हैं, जबकि बीकॉम में एक भी दाखिला नहीं हुआ।

जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह

महाविद्यालय से जुड़े शिक्षकों का मानना है कि नए संस्थान के बारे में पर्याप्त जानकारी न पहुंच पाने के कारण नामांकन कम रहा। प्रशासन का कहना है कि यदि इसे सहशिक्षा संस्थान में बदला जाए तो छात्र संख्या में वृद्धि हो सकती है। इस दिशा में प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजने की तैयारी की जा रही है।

पहुंच की समस्या बनी बड़ी बाधा

कॉलेज की लोकेशन भी कम नामांकन की एक अहम वजह मानी जा रही है। यह संस्थान मुख्य सड़क से करीब दो किलोमीटर अंदर स्थित है और वहां तक पहुंचने के लिए सड़क की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। नियमित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं होने के कारण छात्राओं को ई-रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है। आसपास केवल एक बड़ा गांव है, जिससे आने-जाने में और भी दिक्कत होती है।

आर्थिक स्थिति का भी असर

क्षेत्र के पिछड़े होने का असर यहां पढ़ने वाली छात्राओं पर भी दिखाई देता है। कुछ छात्राएं अपनी पूरी फीस तक जमा नहीं कर पा रही हैं। ऐसे मामलों में कॉलेज प्रशासन को ही सहायता करनी पड़ रही है। इससे स्पष्ट है कि आर्थिक चुनौतियां भी उच्च शिक्षा तक पहुंच में बाधा बन रही हैं।

बुनियादी सुविधाओं में सुधार की जरूरत

महाविद्यालय परिसर में कुछ आवश्यक सुविधाओं की भी कमी है। पानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण छात्रों और स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासन द्वारा इस समस्या को दूर करने के लिए भूमिगत जल टंकी बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

सुविधाएं मौजूद, लेकिन उपयोग कम

हालांकि, कॉलेज में बुनियादी ढांचे की दृष्टि से कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां सामान्य कक्षाओं के अलावा स्मार्ट क्लास, प्रैक्टिकल हॉल और कंप्यूटर सेंटर भी मौजूद हैं। लैब में जरूरी उपकरण और लाइब्रेरी में पर्याप्त पुस्तकें भी उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन छात्र संख्या कम होने के कारण इनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।

समाधान की दिशा में प्रयास जारी

राज्य सरकार और कॉलेज प्रशासन दोनों ही इस स्थिति को सुधारने के लिए प्रयासरत हैं। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि स्थानीय स्तर पर संवाद और प्रचार-प्रसार बढ़ाकर छात्र संख्या में सुधार लाया जा सकता है। साथ ही, परिवहन और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

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