FireSafety – पुराने होटल अग्निकांडों में कार्रवाई सीमित, जांच पर फिर उठे सवाल
FireSafety – लखनऊ में वर्षों पहले हुए होटल अग्निकांडों की जांच और उसके बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। चारबाग स्थित होटल एसएसजे और विराट अग्निकांड के साथ-साथ होटल लेवाना सुइट्स मामले में लंबी जांच के बाद कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, लेकिन बड़ी संख्या में आरोपित अधिकारियों को राहत भी मिल गई। हाल के घटनाक्रमों के बीच इन पुराने मामलों की कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं।

कई अधिकारियों को जांच में मिली राहत
शासन स्तर पर हुई विभागीय जांच के बाद तत्कालीन एलडीए संयुक्त सचिव रहे पीसीएस अधिकारी राकेश कुमार मिश्र और बिरेंद्र कुमार पांडेय को बिना किसी दंड के दोषमुक्त कर दिया गया। जांच पूरी होने के बाद यह निर्णय लिया गया। दोनों अधिकारी उस समय लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रहे थे।
लेवाना अग्निकांड में भी सीमित कार्रवाई
होटल लेवाना सुइट्स अग्निकांड के मामले में एलडीए ने आठ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट शासन को भेजी थी। जांच के बाद इनमें से चार अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई। शेष चार के खिलाफ अलग-अलग स्तर की विभागीय कार्रवाई की गई। इनमें दो अधिकारियों की पदावनति, एक अधिकारी की पेंशन में सीमित कटौती और एक अधिकारी का निलंबन शामिल था। बाद में निलंबित अधिकारी की सेवा बहाल कर दी गई।
एसएसजे और विराट अग्निकांड में भी अधिकांश आरोपित बरी
चारबाग स्थित होटल एसएसजे और होटल विराट अग्निकांड की जांच में भी बड़ी संख्या में अधिकारियों के नाम शामिल किए गए थे। विभागीय जांच पूरी होने के बाद कई अवर अभियंता, सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता सहित अधिकांश आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया। कुछ अधिकारियों का इस दौरान निधन भी हो गया, जबकि कुछ मामलों में जांच समाप्त होने के बाद उन्हें भी राहत मिल गई।
कुछ अधिकारियों पर हुई विभागीय कार्रवाई
दोनों पुराने अग्निकांडों से जुड़े मामलों में जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई, उनमें मुख्य रूप से पेंशन में सीमित प्रतिशत की कटौती और पदावनति जैसी सजा शामिल रही। कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में तीन से सात प्रतिशत तक की कटौती की गई। वहीं, कुछ अधिकारियों को एक पद नीचे कर दिया गया। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार इन कार्रवाइयों को शासन के आदेशों के आधार पर लागू किया गया।
एलडीए ने शासन के फैसलों के अनुरूप किया अमल
एलडीए के अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों में जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी और अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया गया। एलडीए ने केवल जारी आदेशों के अनुरूप कार्रवाई लागू की। विभाग का कहना है कि जिन अधिकारियों को जांच में दोषी पाया गया, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई, जबकि जिनके विरुद्ध पर्याप्त आधार नहीं मिले, उन्हें राहत प्रदान की गई।
इन पुराने मामलों की चर्चा ऐसे समय में फिर तेज हुई है, जब शहर में अग्नि सुरक्षा और भवनों के सुरक्षा मानकों को लेकर नए सिरे से बहस हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय करने के साथ-साथ सुरक्षा नियमों का प्रभावी पालन भी उतना ही आवश्यक है।