Antitrust – ट्रंप और लाइव नेशन मामले में नई अदालती जानकारी से बढ़े सवाल
Antitrust – अमेरिका में लंबे समय से चल रहे लाइव नेशन और उसकी टिकटिंग इकाई टिकटमास्टर से जुड़े प्रतिस्पर्धा-विरोधी मामले में अदालत में पेश दस्तावेजों ने नया मोड़ ला दिया है। रिकॉर्ड के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुकदमे के समझौते से कुछ सप्ताह पहले कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल रैपिनो से बातचीत की थी। इस खुलासे के बाद न्यायिक प्रक्रिया और सरकारी भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

अदालत में क्या जानकारी सामने आई
लाइव नेशन की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों में बताया गया कि फरवरी के दौरान ट्रंप और माइकल रैपिनो के बीच एंटीट्रस्ट मुकदमे को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि कंपनी के वकीलों का कहना है कि इस बातचीत में किसी संभावित समझौते की शर्तों या अंतिम निर्णय पर चर्चा नहीं हुई। इसके बावजूद, मुकदमे के निपटारे से ठीक पहले हुई यह मुलाकात अब सार्वजनिक बहस का विषय बन गई है।
क्यों चर्चा में है लाइव नेशन और टिकटमास्टर
लाइव नेशन दुनिया की प्रमुख लाइव इवेंट कंपनियों में गिनी जाती है और हर वर्ष हजारों संगीत कार्यक्रम आयोजित करती है। इसकी सहयोगी कंपनी टिकटमास्टर बड़े पैमाने पर टिकट बिक्री का संचालन करती है। कई अमेरिकी राज्यों ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने टिकट बिक्री और मूल्य निर्धारण के क्षेत्र में अपना प्रभाव इतना बढ़ा लिया कि प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। इसी आधार पर कंपनी के खिलाफ एंटीट्रस्ट मुकदमा दायर किया गया था।
समझौते पर कई राज्यों ने जताई आपत्ति
अदालत को यह भी बताया गया कि फरवरी और मार्च के दौरान कंपनी और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच कई दौर की बैठकें, वीडियो कॉन्फ्रेंस, फोन कॉल और लिखित संवाद हुए। इन चर्चाओं में व्हाइट हाउस के वकीलों की भी भागीदारी रही। मार्च में सुनवाई शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही न्याय विभाग ने समझौते की घोषणा कर दी। हालांकि कई राज्यों ने इस समझौते का विरोध करते हुए कहा कि इससे टिकटमास्टर और लाइव नेशन के बाजार प्रभुत्व पर पर्याप्त अंकुश नहीं लगेगा।
जूरी के निष्कर्ष और उपभोक्ताओं पर असर
मामले की सुनवाई के दौरान जूरी ने माना कि कंपनी की बाजार स्थिति प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली थी, जिससे कॉन्सर्ट और खेल आयोजनों के दर्शकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। न्यूयॉर्क में हुई सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि 22 राज्यों में उपभोक्ताओं को प्रति टिकट औसतन 1.72 अमेरिकी डॉलर अधिक चुकाने पड़े। अदालत भविष्य में इस अतिरिक्त राशि को उपभोक्ताओं को लौटाने का आदेश भी दे सकती है।
न्याय विभाग की स्वतंत्रता पर उठे नए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच न्याय विभाग की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि यदि व्हाइट हाउस या राष्ट्रपति स्तर से किसी मामले में हस्तक्षेप की आशंका बनती है, तो इससे जांच एजेंसियों की स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इस मामले पर व्हाइट हाउस ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है और संबंधित सवालों को न्याय विभाग के पास भेज दिया। वहीं, न्याय विभाग ने भी इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।