उत्तराखण्ड

TransferPolicy – विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादलों को मिली मंजूरी, अन्य प्रस्तावों पर फैसला बाकी

TransferPolicy – उत्तराखंड में शिक्षकों के वार्षिक तबादला प्रक्रिया को लेकर शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और पारिवारिक परिस्थितियों जैसे विशेष मामलों में तबादलों के प्रस्तावों पर अब विभागीय स्थानांतरण समितियां कार्रवाई कर सकेंगी। हालांकि, अनुरोध के आधार पर दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में किए जाने वाले तबादलों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। शासन ने इस संबंध में प्रस्ताव को दोबारा कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के पास विचार के लिए भेज दिया है। इस बीच विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समयसीमा को देखते हुए तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा गया है।

विशेष श्रेणी के मामलों को मिली प्राथमिकता

शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, स्थानांतरण अधिनियम की धारा 27 के तहत ऐसे शिक्षकों के मामलों पर पहले कार्रवाई होगी, जिनके तबादले का आधार गंभीर व्यक्तिगत या पारिवारिक परिस्थितियां हैं। इनमें स्वयं, पति या पत्नी की गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, गंभीर रूप से बीमार बच्चे, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा से प्रभावित कर्मचारी तथा माता-पिता की गंभीर बीमारी जैसे मामले शामिल हैं। इन श्रेणी के प्रस्तावों पर नियुक्ति प्राधिकारी स्तर पर गठित स्थानांतरण समितियां नियमानुसार निर्णय लेंगी।

अनुरोध आधारित तबादलों पर अभी इंतजार

दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में अनुरोध के आधार पर होने वाले तबादलों को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। शासन ने इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से परामर्श लेने का फैसला किया है। विभाग का कहना है कि संबंधित विभाग से राय मिलने के बाद अलग से आदेश जारी किए जाएंगे। इससे ऐसे शिक्षकों को फिलहाल कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ सकता है, जिन्होंने अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था।

समयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी भेजा गया

शिक्षक तबादलों की प्रक्रिया पहले से तय कार्यक्रम के अनुरूप पूरी नहीं हो सकी है। स्थानांतरण की अंतिम तिथि पहले 10 जून निर्धारित थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया। इसके बावजूद शिक्षा विभाग का मानना है कि उपलब्ध समय में पूरी प्रक्रिया समाप्त करना संभव नहीं होगा। विभागीय अधिकारियों ने शासन से समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि सभी प्रस्तावों का नियमानुसार परीक्षण कर आवश्यक आदेश जारी किए जा सकें।

निर्वाचन आयोग की अनुमति का भी इंतजार

तबादला प्रक्रिया के सामने एक प्रशासनिक पहलू भी मौजूद है। राज्य में निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य जारी होने के कारण मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। शिक्षा विभाग को अभी इस संबंध में आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी है। ऐसे में कुछ मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले निर्वाचन आयोग की स्वीकृति भी जरूरी होगी।

पुराने प्रस्तावों के साथ मांगे जाएंगे नए आवेदन

शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के अनुसार, जिन तबादला प्रस्तावों को वर्तमान में स्थानांतरण समितियों के पास भेजा गया है, वे पिछले वर्ष प्राप्त आवेदन हैं। विभाग अब इन पुराने प्रस्तावों के साथ नए आवेदन भी आमंत्रित करेगा, ताकि पात्र शिक्षकों को अवसर मिल सके। इसके साथ ही शासन से तबादला प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है, जिससे सभी मामलों का निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से निस्तारण किया जा सके।

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