उत्तराखण्ड

FaithFestival – निर्जला एकादशी पर हरिद्वार में उमड़ी आस्था, गंगा घाटों पर आया श्रद्धालुओं का सैलाब

FaithFestival – निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे और पवित्र गंगा में स्नान कर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए दान-पुण्य भी किया। पूरे दिन घाटों पर मंत्रोच्चार, भजन और पूजा-पाठ का माहौल बना रहा, जिससे शहर का धार्मिक स्वरूप और अधिक जीवंत दिखाई दिया।

गंगा स्नान के बाद किया गया पूजन और दान

निर्जला एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद भगवान विष्णु की आराधना की और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत एवं पूजन संपन्न किया। कई श्रद्धालुओं ने जल, फल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान कर धार्मिक मान्यताओं का निर्वहन किया। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने घाटों पर आयोजित धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया और पूरे श्रद्धाभाव के साथ पर्व मनाया।

धार्मिक मान्यता के चलते दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु

सनातन परंपरा में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के साथ उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान किया और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। दिनभर घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर प्रशासन की विशेष नजर

पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। प्रमुख गंगा घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई और पूरे क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी गई। भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासनिक अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाओं का जायजा लेकर आवश्यक निर्देश भी दिए।

पूरे दिन बना रहा धार्मिक और श्रद्धामय वातावरण

निर्जला एकादशी के अवसर पर हरिद्वार के प्रमुख घाटों और मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रही। धार्मिक भजनों, शंखनाद और वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना की। पर्व के दौरान धार्मिक आस्था के साथ अनुशासन और व्यवस्थाओं का भी समुचित पालन देखने को मिला। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तैयारियों के कारण श्रद्धालुओं ने सुरक्षित वातावरण में अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।

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