EducationPolicy – आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
EducationPolicy – प्रदेश में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत इस साल प्रवेश प्रक्रिया ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में दाखिला दिलाने की दिशा में इस बार उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। सत्र 2026-27 में अब तक 1.43 लाख से अधिक बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया जा चुका है, जो पिछले चार वर्षों के मुकाबले सबसे अधिक है। यह उपलब्धि शिक्षा विभाग की सख्त निगरानी और सुव्यवस्थित प्रक्रिया का परिणाम मानी जा रही है।

प्रवेश प्रक्रिया में सख्ती और नियमित समीक्षा का असर
इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया। आवेदन की पूरी प्रक्रिया को तीन चरणों तक सीमित रखा गया, जिससे अनावश्यक देरी और जटिलताओं में कमी आई। विभागीय अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें हर स्तर पर प्रगति का आकलन किया गया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसका असर यह हुआ कि सीट आवंटन के बाद बच्चों का वास्तविक प्रवेश भी तेजी से सुनिश्चित हो सका।
सीट आवंटन के मुकाबले प्रवेश का आंकड़ा बढ़ा
इस बार कुल 1.95 लाख सीटें आरटीई के तहत निर्धारित की गई थीं, जिनमें से 1.43 लाख से अधिक सीटों पर बच्चों का दाखिला हो चुका है। यह संख्या न केवल पिछले साल के 1.40 लाख प्रवेश से अधिक है, बल्कि यह दर्शाती है कि सरकारी प्रयासों का असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल प्रवेश संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो इस योजना की बढ़ती स्वीकार्यता को भी दर्शाती है।
अधिकारियों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिन बच्चों को सीट आवंटित हो चुकी है, उनका प्रवेश हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बच्चे का नाम केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे वास्तविक रूप से स्कूल तक पहुंचाया जाए। इस दिशा में जिलों को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट देने के लिए भी कहा गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा सके।
शेष बच्चों के प्रवेश पर भी जारी है कार्य
समग्र शिक्षा के उपनिदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि जिन बच्चों का प्रवेश अभी बाकी है, उनके लिए भी तेजी से काम किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि सभी पात्र बच्चों को जल्द से जल्द स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए। इसके लिए अभिभावकों से संपर्क, स्कूलों के साथ समन्वय और प्रशासनिक स्तर पर फॉलोअप लगातार जारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि निर्धारित लक्ष्य को समय रहते पूरा कर लिया जाएगा।
पिछले वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं लगातार बढ़ोतरी
यदि बीते पांच वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो आवेदन और प्रवेश दोनों में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। सत्र 2022-23 में जहां करीब 82 हजार बच्चों का प्रवेश हुआ था, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 96 हजार के पार पहुंच गई। इसके बाद 2024-25 में 1.12 लाख और 2025-26 में 1.40 लाख से अधिक बच्चों का दाखिला हुआ। अब 2026-27 में यह आंकड़ा 1.43 लाख के पार पहुंच चुका है, जो इस योजना की सफलता को स्पष्ट करता है।
शिक्षा तक समान पहुंच की दिशा में अहम कदम
आरटीई के तहत यह पहल समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निजी विद्यालयों में प्रवेश मिलने से इन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलता है, जिससे उनके भविष्य की संभावनाएं मजबूत होती हैं। सरकार और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए।