उत्तर प्रदेश

BusFare – डीजल महंगा होने से रोडवेज किराया बढ़ाने की तैयारी

BusFare – ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब सार्वजनिक परिवहन पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के सामने बढ़ती परिचालन लागत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसी वजह से रोडवेज बसों का किराया बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण निगम को प्रतिदिन लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।

सूत्रों की मानें तो परिवहन विभाग जल्द ही किराया संशोधन का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रख सकता है। हालांकि अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। बताया जा रहा है कि यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ डालने से पहले विभाग आय और खर्च के आंकड़ों का विस्तृत आकलन कर रहा है।

बढ़ती डीजल कीमतों से बढ़ा दबाव

प्रदेश में संचालित रोडवेज बसों की संख्या काफी बड़ी है और इनका दैनिक संचालन भारी मात्रा में डीजल पर निर्भर करता है। बीते कुछ दिनों में डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे परिवहन निगम का खर्च तेजी से बढ़ा है।

अधिकारियों के मुताबिक केवल लखनऊ क्षेत्र में ही रोजाना बड़ी मात्रा में डीजल की खपत होती है। हालिया मूल्य वृद्धि के बाद परिवहन विभाग को प्रतिदिन करीब नौ लाख रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि किराया बढ़ाने का विकल्प अब गंभीरता से विचाराधीन है।

दो रुपये तक बढ़ सकता है किराया

परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि किराये में सीमित बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शुरुआती चर्चा के अनुसार बस किराया दो रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय परिवहन निगम बोर्ड की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि निगम की वित्तीय स्थिति को संतुलित बनाए रखने के लिए आय और व्यय के बीच संतुलन जरूरी है। लगातार बढ़ती परिचालन लागत के कारण विभाग पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

हर दिन लाखों यात्री करते हैं सफर

राज्य परिवहन निगम की बसों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बनाए रखने में रोडवेज की अहम भूमिका है। किराये में किसी भी संभावित बढ़ोतरी का असर सीधे आम यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव केवल परिवहन निगम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे रोजमर्रा की यात्रा करने वाले कर्मचारियों, छात्रों और आम यात्रियों का खर्च भी बढ़ जाता है।

कैब और टैक्सी सेवाओं में भी असर

ईंधन महंगा होने का असर निजी परिवहन सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। कई जगहों पर कैब और टैक्सी सेवाओं के किराये में बढ़ोतरी की शिकायतें सामने आई हैं। यात्रियों का कहना है कि छोटी दूरी के लिए भी अब पहले की तुलना में अधिक किराया लिया जा रहा है।

हालांकि कुछ कैब संचालकों का कहना है कि किराया बढ़ाने का फैसला प्लेटफॉर्म की नीति और मांग के अनुसार तय होता है। उनका दावा है कि सभी सेवाओं में आधिकारिक रूप से किराया नहीं बढ़ाया गया है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर यात्रियों को अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।

आने वाले दिनों में हो सकता है फैसला

परिवहन विभाग के अधिकारियों ने अभी सार्वजनिक रूप से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए किराया संशोधन की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा रहा।

आर्थिक दबाव और बढ़ते संचालन खर्च के बीच आने वाले दिनों में रोडवेज किराये को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल यात्री और परिवहन विभाग दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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