SupremeCourt – अदालत में अभद्र व्यवहार पर बार एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति
SupremeCourt- सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में सुनवाई के दौरान हुई एक असामान्य घटना पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने अदालत के समक्ष एक पक्षकार के कथित अनुचित व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और अदालतों के प्रति सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। एससीबीए ने न्यायालय की मर्यादा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सुनवाई के दौरान हुए घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया
एससीबीए की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान एक पक्षकार का व्यवहार न्यायालय की अपेक्षित मर्यादा के अनुरूप नहीं था। एसोसिएशन के अनुसार, अदालत की कार्यवाही के दौरान अभद्र भाषा, व्यवधान या किसी भी प्रकार का अनुचित आचरण न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है और कानून के शासन के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
न्यायालय की गरिमा बनाए रखने पर जोर
बार एसोसिएशन ने कहा कि अदालतें लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनकी गरिमा हर परिस्थिति में सुरक्षित रहनी चाहिए। एससीबीए का मानना है कि न्यायालय के भीतर अनुशासन और सम्मान बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
रिकॉर्डिंग और प्रसारण के लिए दिशा-निर्देश की मांग
घटना के बाद एससीबीए ने अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग और उसके सार्वजनिक प्रसार को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि कई बार अदालत की कार्यवाही के वीडियो या संपादित अंश सोशल मीडिया पर संदर्भ से अलग तरीके से साझा किए जाते हैं, जिससे वास्तविक घटनाक्रम की गलत तस्वीर सामने आ सकती है।
सोशल मीडिया पर दुरुपयोग रोकने की आवश्यकता
एसोसिएशन ने कहा कि न्यायालय की रिकॉर्डिंग का दुरुपयोग रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि अदालत की कार्यवाही को आंशिक या संपादित रूप में प्रसारित किया जाता है, तो इससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और न्यायपालिका की निष्पक्ष छवि प्रभावित होने की आशंका रहती है।
केंद्र सरकार से भी की अपील
एससीबीए ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि ऐसे मामलों में आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी उपाय किए जाएं, जहां अदालत की कार्यवाही से जुड़े वीडियो या संपादित क्लिप न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने या लोगों का विश्वास कमजोर करने के उद्देश्य से प्रसारित किए जाएं। एसोसिएशन का कहना है कि संबंधित नियमों के तहत ऐसे कंटेंट पर समय रहते उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
न्यायिक संस्थानों के सम्मान की जिम्मेदारी
बार एसोसिएशन ने अपने बयान के अंत में कहा कि न्यायालय की कार्यवाही की गरिमा बनाए रखना केवल न्यायाधीशों या वकीलों की ही नहीं, बल्कि सभी संबंधित पक्षों की साझा जिम्मेदारी है। एससीबीए के अनुसार, न्यायिक संस्थानों के प्रति सम्मान और अनुशासन लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है और इस सिद्धांत से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।