Subhashita – पीएम मोदी ने साझा किया सत्य, लोकहित और जागरूकता का संदेश
Subhashita के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सत्य, शुभ विचार और लोकहित से जुड़े संदेश साझा किए। उन्होंने लोगों से सत्य एवं प्रमाणिक बातों को सुनने-समझने, अच्छे विचारों को जीवन में अपनाने और अपने आचरण को बेहतर बनाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि समाज और राष्ट्र को जागरूक तथा सशक्त बनाने के लिए जनहित से जुड़ी सही सूचनाओं का प्रसार जरूरी है।

पीएम मोदी ने सुभाषित के जरिए क्या कहा
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्वस्थ शरीर, अच्छे आचरण और श्रेष्ठ गुणों के साथ जीवन को लोककल्याण के लिए समर्पित करने की बात कही। उनके संदेश का केंद्र सत्य और सकारात्मक विचारों को अपनाने के साथ-साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे ऐसी सूचनाओं को आगे बढ़ाएं जो सत्य, प्रमाणिक और जनहित से जुड़ी हों। प्रधानमंत्री के मुताबिक, सही जानकारी का प्रसार समाज को जागरूक बनाने के साथ लोगों को अधिक सक्षम और आपसी सद्भाव को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
संस्कृत श्लोक भी किया साझा
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के साथ संस्कृत का एक प्राचीन श्लोक भी साझा किया। इसमें देवताओं से कानों से शुभ वचन सुनने और आंखों से कल्याणकारी दृश्य देखने की प्रार्थना की गई है। श्लोक में स्वस्थ एवं स्थिर अंगों के साथ जीवन को देवहित के कार्यों में लगाने की कामना भी व्यक्त की गई है।
श्लोक इस प्रकार है:
‘भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः।’
इस संदेश में जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण, अच्छे विचारों और समाज के हित में उपयोग करने की भावना प्रमुख रूप से सामने आती है।
पहले भी सुभाषित साझा करते रहे हैं पीएम
प्रधानमंत्री इससे पहले भी सोशल मीडिया पर संस्कृत के श्लोक और सुभाषित साझा करते रहे हैं। 7 अगस्त को साझा किए गए एक सुभाषित में उन्होंने परोपकार की भावना को मनुष्य के स्वभाव से जोड़ा था। उसमें चंद्रमा द्वारा कुमुदिनी को प्रकाशित करने का उदाहरण देते हुए बताया गया था कि उदार और श्रेष्ठ व्यक्ति बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के दूसरों का हित करते हैं।
उस श्लोक का भाव यह था कि महान लोगों के लिए परोपकार किसी बाहरी दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि उनके स्वभाव का हिस्सा होता है। इस संदेश में निस्वार्थ सेवा और दूसरों के कल्याण को जीवन का स्वाभाविक उद्देश्य बताया गया था।
6 अगस्त के संदेश में मातृभूमि का उल्लेख
6 अगस्त को भी प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक साझा किया था, जिसमें पृथ्वी और मातृभूमि के कल्याण की कामना की गई थी। इसमें ऐसी धरती का उल्लेख है, जहां श्रेष्ठ वनस्पतियां और औषधियां उपलब्ध हों तथा जो स्थिर और कल्याणकारी हो।
श्लोक के भावार्थ में मातृभूमि की सेवा को विद्या, शौर्य, सत्य और स्नेह जैसे गुणों से जोड़ा गया था। संदेश में ऐसी भूमि की कामना की गई थी, जो लोगों को सुख और कल्याण प्रदान करे और जिसकी सेवा निरंतर की जाए।
लगातार साझा किए जा रहे इन सुभाषितों में अलग-अलग अवसरों पर सत्य, परोपकार, सद्गुण, मातृभूमि और लोककल्याण जैसे विषय सामने आते रहे हैं। सोमवार के संदेश में भी सही जानकारी के प्रसार और समाज को जागरूक बनाने पर विशेष जोर दिया गया।