Resident Doctor – सूरत अस्पताल में डॉक्टर की मौत पर गुजरात सरकार ने जांच के आदेश दिए
Resident Doctor की मौत के मामले में गुजरात सरकार ने सूरत के न्यू सिविल अस्पताल में जांच के आदेश दिए हैं। घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने अधिकारियों के साथ स्थिति की जानकारी ली और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में पैनल के साथ फोरेंसिक जांच भी कराई गई है, ताकि मौत से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि डॉक्टर ने किन परिस्थितियों में इतना गंभीर कदम उठाया।

उच्चस्तरीय समिति को सौंपी गई जांच
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की तेजी और पारदर्शिता के साथ जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर सिविल अस्पताल के डीन और सुपरिटेंडेंट की संयुक्त अध्यक्षता में समिति बनाई गई है।
जांच की निगरानी के लिए गांधीनगर में मेडिकल एजुकेशन के अतिरिक्त निदेशक सचदे को जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का कहना है कि जांच में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न की भी होगी जांच
स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि क्या डॉक्टर को रैगिंग, मानसिक दबाव या शारीरिक प्रताड़ना जैसी किसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। जांच में अस्पताल और छात्रावास दोनों स्तरों पर संभावित कारणों की पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों से कहा गया है कि किसी भी पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। यदि जांच में किसी व्यक्ति की ओर से रैगिंग, उत्पीड़न या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
साथी डॉक्टरों और छात्रों के बयान दर्ज
मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद छात्रावास में रहने वाले साथी छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों के बयान दर्ज किए गए। शुरुआती चरण में बयान दर्ज करने का उद्देश्य घटनाक्रम से जुड़ी तत्काल जानकारी को सुरक्षित करना है, ताकि जांच आगे बढ़ने पर महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाएं।
एंटी-रैगिंग समिति को भी मामले की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने अस्पताल और छात्रावास परिसर का निरीक्षण कर उन स्थानों की जानकारी जुटाई, जो घटना की परिस्थितियों को समझने में मदद कर सकते हैं।
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन
प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा है कि जांच में यदि किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा। सरकार ने रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और प्रशासनिक लापरवाही जैसे संभावित पहलुओं को गंभीरता से जांचने को कहा है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य केवल घटना के कारणों का पता लगाना नहीं, बल्कि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो उसके लिए जिम्मेदारी भी तय करना है।
परिवार से मंत्री ने की बातचीत
घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने मृतक डॉक्टर के पिता से फोन पर बातचीत की और परिवार के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि मामले की जांच गंभीरता से की जाएगी और किसी की भूमिका सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई होगी।
मंत्री ने इस दौरान परिवार को प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। सरकार ने कहा है कि जांच को तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
छात्रों से परेशानी साझा करने की अपील
स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल और मेडिकल संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों से अपील की कि किसी भी तरह के दबाव, परेशानी या मानसिक कठिनाई की स्थिति में वे अकेले न रहें। उन्होंने छात्रों से डीन, सुपरिटेंडेंट या गांधीनगर स्थित संबंधित अधिकारियों से फोन अथवा ईमेल के माध्यम से संपर्क करने को कहा।
मंत्री ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को समय रहते सामने लाना जरूरी है, ताकि प्रशासन उनकी मदद कर सके। उन्होंने छात्रों से किसी भी गंभीर परिस्थिति में सहायता लेने और अपनी परेशानी साझा करने की अपील की है।