राष्ट्रीय

Smuggling – जखाऊ हेरोइन तस्करी मामले में छह पाकिस्तानी नागरिकों को आठ साल की सजा

Smuggling – गुजरात के जखाऊ तट से जुड़े बहुचर्चित हेरोइन तस्करी मामले में विशेष एनआईए अदालत ने छह पाकिस्तानी नागरिकों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, कथित तौर पर मादक पदार्थों की खेप लेने वाले भारतीय आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। यह मामला वर्ष 2019 में भारतीय समुद्री सीमा के पास बड़ी मात्रा में ब्राउन हेरोइन की बरामदगी से जुड़ा था।

विशेष अदालत का फैसला

विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश हेमांग रावल ने छह पाकिस्तानी नागरिकों को आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियम, 1950 के तहत भी पांच वर्ष की सजा निर्धारित की, जो मुख्य सजा के साथ-साथ चलेगी। इसके अलावा विदेशी अधिनियम के तहत प्रत्येक दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि, अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और एनडीपीएस अधिनियम की कुछ धाराओं में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को राहत दी।

भारतीय आरोपी को मिला संदेह का लाभ

मामले में एक भारतीय व्यक्ति पर समुद्र के बीच पाकिस्तानी नाव से मादक पदार्थों की खेप लेने का आरोप लगाया गया था। जांच एजेंसी का कहना था कि वह भारतीय नाव के माध्यम से खेप प्राप्त करने वाला था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि उसके खिलाफ आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके। इसी आधार पर उसे बरी कर दिया गया।

वर्ष 2019 में हुई थी बड़ी कार्रवाई

एनआईए के रिकॉर्ड के अनुसार, 20 मई 2019 को राजस्व खुफिया निदेशालय को सूचना मिली थी कि पाकिस्तान की एक मछली पकड़ने वाली नाव गुजरात के जखाऊ तट के पास भारतीय समुद्री सीमा में मादक पदार्थों की खेप पहुंचाने वाली है। सूचना के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया।

अगले दिन भारतीय तटरक्षक बल के जहाज ‘अरिंजय’ ने पाकिस्तानी झंडे वाली संदिग्ध नाव को घेर लिया। कार्रवाई के दौरान नाव पर मौजूद लोगों ने कई संदिग्ध बैग समुद्र में फेंक दिए। बाद में तलाशी अभियान में 194 पैकेट बरामद किए गए। इसके बाद विभिन्न एजेंसियों ने अलग-अलग अभियानों में 17 अतिरिक्त पैकेट भी बरामद किए।

जांच में सामने आए अहम तथ्य

जांच के दौरान पाकिस्तानी नाव ‘अल-मदीना’ और भारतीय नाव ‘फेजाने किरमानी’ को जांच के दायरे में लिया गया। पूछताछ में पाकिस्तानी नाव के कप्तान सफदर अली ने यह स्वीकार किया कि उसे मादक पदार्थों की खेप भारत तक पहुंचाने की जानकारी थी। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, भुज की रिपोर्ट में जब्त सामग्री की पुष्टि ब्राउन हेरोइन के रूप में हुई। जांच एजेंसियों के अनुसार, छह पाकिस्तानी नागरिक 11 पॉलीप्रोपाइलीन बैग में पैक कुल 330 पैकेट मादक पदार्थ लेकर भारतीय समुद्री सीमा की ओर पहुंचे थे।

एनआईए की जांच और अभियोजन का पक्ष

मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं को देखते हुए गृह मंत्रालय ने 22 मई 2020 को इसकी जांच एनआईए को सौंप दी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि सात आरोपियों ने नौ अन्य वांछित व्यक्तियों के साथ मिलकर भारत में बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी की साजिश रची थी। आरोपपत्र में कहा गया कि कराची से गुजरात तक प्रतिबंधित खेप पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी नाव ‘अल-मदीना’ का इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाते हुए छह पाकिस्तानी नागरिकों को दोषी करार दिया, जबकि भारतीय आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया।

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