SilverLine – केरल सरकार ने विवादित रेल परियोजना बंद करने का लिया फैसला
SilverLine – केरल में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक फैसलों की रफ्तार तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सतीशन की अगुवाई में हुई पहली अहम कैबिनेट बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उस फैसले की हो रही है, जिसके तहत लंबे समय से विवादों में रही सिल्वरलाइन रेल परियोजना को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने इस परियोजना के लिए जारी भूमि अधिग्रहण अधिसूचना भी वापस लेने की घोषणा की है।

इस फैसले को उन हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे थे। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आंदोलन में शामिल लोगों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा राज्य के युवाओं को ध्यान में रखते हुए पब्लिक सर्विस कमीशन की रैंक सूची की अवधि बढ़ाने का फैसला भी लिया गया है।
कैबिनेट बैठक में लिए गए अहम फैसले
नई सरकार की पहली प्रमुख बैठकों में शामिल इस निर्णय को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में विकास योजनाओं को आगे बढ़ाते समय जनता की चिंताओं और पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। सिल्वरलाइन परियोजना को लेकर लंबे समय से सामाजिक संगठनों, किसानों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से आपत्तियां उठाई जा रही थीं।
सरकार ने साफ किया कि भूमि अधिग्रहण की मौजूदा अधिसूचना अब प्रभावी नहीं रहेगी। इसके साथ ही उन लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की सिफारिश भी की जाएगी, जिन्होंने परियोजना के खिलाफ आंदोलन किया था। राज्य सरकार का मानना है कि संवाद और सहमति के आधार पर ही भविष्य की विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
क्या था सिल्वरलाइन रेल प्रोजेक्ट
सिल्वरलाइन परियोजना पूर्ववर्ती पिनराई विजयन सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल थी। इस योजना के तहत केरल के दक्षिणी हिस्से को उत्तरी क्षेत्र से जोड़ने के लिए सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी थी। प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई करीब 529 किलोमीटर तय की गई थी और इसकी अनुमानित लागत लगभग 64 हजार करोड़ रुपये बताई गई थी।
परियोजना को वर्ष 2019 में रेलवे बोर्ड से सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। राज्य सरकार का दावा था कि इससे यात्रा का समय कम होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। इसके जरिए केरल के अलग-अलग शहरों के बीच तेज और आधुनिक रेल संपर्क उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी।
पर्यावरण और विस्थापन को लेकर बढ़ा विरोध
सिल्वरलाइन परियोजना के खिलाफ शुरुआत से ही कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। कांग्रेस और भाजपा सहित कई विपक्षी दलों ने इस योजना को पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताया था। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना था कि प्रस्तावित रेल मार्ग वेटलैंड्स, धान के खेतों और संवेदनशील पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरता, जिससे प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता था।
विरोध करने वाले समूहों ने यह भी दावा किया था कि इस परियोजना के कारण हजारों परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है। अनुमान लगाया गया था कि करीब 20 हजार लोगों पर इसका सीधा असर पड़ता। इसी मुद्दे को लेकर राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए थे और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया था।
युवाओं के लिए भी सरकार की घोषणा
कैबिनेट बैठक में केवल परियोजना से जुड़े फैसले ही नहीं लिए गए, बल्कि रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी निर्णय हुआ। सरकार ने केरल पब्लिक सर्विस कमीशन की रैंक सूची की वैधता 30 नवंबर तक बढ़ाने का ऐलान किया है। इससे उन उम्मीदवारों को राहत मिलेगी जो सरकारी नौकरियों की नियुक्ति प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर शुरुआती दौर में ही स्पष्ट संदेश देने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में राज्य की विकास योजनाओं और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर और फैसले सामने आ सकते हैं।