Security – ऑपरेशन सिंदूर को सेना प्रमुख ने बताया स्मार्ट पावर मॉडल
Security – नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की सैन्य रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। ‘सिक्योरिटी टू प्रॉस्पेरिटी: स्मार्ट पावर फॉर सस्टेन्ड नेशनल ग्रोथ’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आधुनिक दौर में भारत की स्मार्ट पावर क्षमता का प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है।

22 मिनट की कार्रवाई का जिक्र
सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि 6 और 7 मई 2025 की रात भारत ने अपनी रणनीतिक क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया। उनके अनुसार ऑपरेशन सिंदूर एक सीमित समय के भीतर संचालित ऐसा अभियान था, जिसमें सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ सूचना प्रबंधन, कूटनीतिक संदेश और आर्थिक सोच का भी समन्वय देखने को मिला। उन्होंने बताया कि यह पूरा अभियान लगभग 22 मिनट की तय ऑपरेशनल अवधि में अंजाम दिया गया था।
सैन्य और रणनीतिक संतुलन पर जोर
जनरल द्विवेदी ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल सैन्य प्रतिक्रिया देना नहीं था, बल्कि यह दिखाना भी था कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना बहुआयामी रणनीति के साथ किया जाता है। उनके अनुसार किसी भी सैन्य कार्रवाई में केवल हथियारों की ताकत पर्याप्त नहीं होती, बल्कि सूचना तंत्र, अंतरराष्ट्रीय संदेश और आर्थिक संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।
आतंक ढांचे को पहुंचा नुकसान
सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान आतंक से जुड़े ढांचे को गंभीर क्षति पहुंचाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से बनी कुछ रणनीतिक परिस्थितियों को इस कार्रवाई के जरिए बदला गया। उनके अनुसार अभियान को सीमित समय के बाद रोकना भी पहले से तय रणनीति का हिस्सा था। इससे यह संकेत गया कि भारत अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग नियंत्रित और सोच-समझकर करता है।
88 घंटे बाद रोका गया अभियान
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अभियान को 88 घंटे बाद रोकने का फैसला भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था। उन्होंने इसे सैन्य संयम और संतुलित निर्णय प्रक्रिया का उदाहरण बताया। सेना प्रमुख के अनुसार किसी भी कार्रवाई में यह तय करना जरूरी होता है कि कब और कितनी शक्ति का इस्तेमाल किया जाए। यही आधुनिक रणनीतिक सोच की पहचान है।
बदलती वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र
जनरल द्विवेदी ने वैश्विक हालात पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय अस्थिरता, अविश्वास और बदलते गठबंधनों के दौर से गुजर रही है। उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में लगातार नए समीकरण बन रहे हैं, जिससे सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में देशों को केवल पारंपरिक सैन्य ताकत पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
स्मार्ट पावर को बताया भविष्य की जरूरत
सेना प्रमुख ने कहा कि आज के दौर में स्मार्ट पावर का अर्थ केवल रक्षा क्षमता नहीं है, बल्कि कूटनीति, सूचना नियंत्रण और आर्थिक मजबूती के साथ संतुलित राष्ट्रीय शक्ति तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत इसी दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी तैयारी कर रहा है।