IndiaUSRelations – आर्थिक बदलावों से मजबूत हुई भारत-अमेरिका साझेदारी
IndiaUSRelations – अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि पिछले एक दशक में भारत में हुए आर्थिक और नीतिगत बदलावों ने भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा दी है। उनके अनुसार 2014 के बाद शुरू हुए सुधारों ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को पहले की तुलना में अधिक मजबूत बनाया है। उन्होंने यह बात वॉशिंगटन में आयोजित ‘कैपिटल हिल समिट 2026’ के दौरान कही।

आर्थिक बदलावों को बताया अहम आधार
अमेरिका-भारत फ्रेंडशिप काउंसिल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बोलते हुए क्वात्रा ने कहा कि भारत इस समय बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में तेजी से हो रहे आर्थिक विकास और सुधारों ने वैश्विक साझेदारियों को भी नई मजबूती दी है। उनके अनुसार यही कारण है कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग लगातार नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।
व्यापार लक्ष्य को लेकर बड़ी योजना
भारतीय राजदूत ने बताया कि दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 220 अरब डॉलर के आसपास है। उन्होंने कहा कि व्यापार के साथ-साथ तकनीक, ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी तेजी से आगे बढ़ रही है।
रक्षा सहयोग में आई तेजी
क्वात्रा ने रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अब अमेरिका के कई महत्वपूर्ण रक्षा प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा विदेशी उपयोगकर्ता बन चुका है। उनके अनुसार दोनों देशों की सेनाएं साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न स्तरों पर मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और अमेरिका के बीच समन्वय लगातार बढ़ रहा है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर
कार्यक्रम के दौरान राजदूत ने नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि SHANTI एक्ट लागू होने के बाद निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में नई भागीदारी के रास्ते खुले हैं। इससे दोनों देशों के बीच तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी के बयान का उल्लेख
विनय मोहन क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए संबोधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित स्वाभाविक सहयोगी भी हैं। उनके अनुसार पिछले कई वर्षों में अमेरिका के अलग-अलग प्रशासन ने भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने में निरंतर भूमिका निभाई है।
अमेरिकी नेताओं की रही मौजूदगी
इस सम्मेलन में अमेरिकी सांसद रो खन्ना, डेबोरा रॉस, टिम मूर और सीनेटर स्टीव डाइन्स समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य, वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक राजनीति और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।