HumanRights – बांग्लादेश में दरगाह पर हमले को लेकर बढ़ी चिंता
HumanRights – बांग्लादेश में एक दरगाह पर श्रद्धालुओं के साथ हुई हिंसक घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। फ्रांस स्थित संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश फाउंडेशन ने ढाका में हजरत शाह अली बगदादी दरगाह पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और सूफी परंपराओं पर सीधा हमला बताया है। संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कट्टरपंथी समूहों का मनोबल बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार 14 मई की रात दरगाह परिसर में आयोजित एक शांतिपूर्ण धार्मिक सभा के दौरान कुछ लोगों ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। घटना में कई लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। संगठन ने कहा कि यह हमला केवल एक स्थानीय घटना नहीं बल्कि देश में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की बढ़ती घटनाओं का हिस्सा माना जा रहा है।
कट्टरपंथी संगठनों पर लगाए गए आरोप
मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि हमले में कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े कुछ समूहों के लोग शामिल थे। संगठन के मुताबिक हमलावर डंडों के साथ दरगाह परिसर में पहुंचे और वहां मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। घटना के दौरान कई श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
एक घायल व्यक्ति के हवाले से बताया गया कि अचानक हमला शुरू होने के बाद लोग मुख्य द्वार की ओर भागने लगे। इसी दौरान कई लोगों को चोटें आईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि हमला काफी योजनाबद्ध तरीके से किया गया था, जिससे धार्मिक कार्यक्रम में शामिल लोग भयभीत हो गए।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
संगठन ने घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया कि दरगाह के बाहर पुलिस की मौजूदगी थी, लेकिन हालात को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में व्यवस्था प्रभावी नहीं दिखी। इसी वजह से अब प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने बांग्लादेश सरकार से सभी धार्मिक समुदायों और सूफी संस्थानों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की है।
कई दरगाहों को बनाए जाने का दावा
जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश फाउंडेशन के संस्थापक शाहनूर इस्लाम ने कहा कि हाल के महीनों में देशभर में कई दरगाहों और सूफी स्थलों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। संगठन के अनुसार अगस्त 2024 के बाद से 100 से अधिक धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की खबरें मिली हैं।
संगठन का कहना है कि इन मामलों में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से चिंता और बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक किसी बड़े मामले में जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं मिल सकी है, जिससे कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की अपील की है। साथ ही दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।
संगठन ने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो धार्मिक तनाव और सामाजिक असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है।