स्वास्थ्य

GallbladderStone – पित्ताशय की पथरी को नजरअंदाज करना सेहत पर पड़ सकता है भारी

GallbladderStone – पित्ताशय या किडनी में बनने वाली पथरी कई बार लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट संकेत के शरीर में मौजूद रह सकती है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि यह समस्या गंभीर नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर जांच और उचित उपचार न मिलने पर पथरी कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है। हाल के दिनों में पित्ताशय की पथरी को लेकर बढ़ी चर्चा के बीच विशेषज्ञों ने लोगों को इसके लक्षणों और उपचार को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

गॉलब्लैडर और किडनी की पथरी में क्या होता है अंतर

डॉक्टर बताते हैं कि पित्ताशय में बनने वाली पथरी प्रायः कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन के कण जमा होने से विकसित होती है। पित्ताशय का मुख्य कार्य पाचन में मदद करने वाले पित्त को संग्रहित और आवश्यकता पड़ने पर छोड़ना होता है। जब इस प्रक्रिया में बाधा आती है या पित्त का संतुलन बिगड़ता है, तब धीरे-धीरे पथरी बनने लगती है। दूसरी ओर, किडनी की पथरी मूत्र में मौजूद कैल्शियम, यूरिक एसिड और अन्य खनिजों के क्रिस्टल के जमा होने से बनती है। दोनों समस्याएं अलग कारणों से होती हैं और इनके उपचार का तरीका भी अलग हो सकता है।

शुरुआती चरण में नहीं दिखते स्पष्ट संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार, पित्ताशय की पथरी से पीड़ित कई लोगों को लंबे समय तक कोई परेशानी महसूस नहीं होती। लेकिन जैसे ही पथरी का आकार बढ़ता है या वह पित्त के प्रवाह में रुकावट पैदा करती है, तब अचानक पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द शुरू हो सकता है। इसके साथ मतली, उल्टी और तैलीय भोजन करने के बाद तकलीफ बढ़ने जैसी शिकायतें भी सामने आ सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

इलाज में देरी से बढ़ सकती हैं जटिलताएं

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विपिन राय के अनुसार, यदि जांच में गॉलब्लैडर या किडनी स्टोन की पुष्टि होती है तो उपचार में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए। कई मामलों में किडनी की छोटी पथरी दवाओं या अन्य चिकित्सा पद्धतियों से बाहर निकल सकती है, जबकि पित्ताशय की पथरी में अक्सर सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रक्रिया को कोलेसिस्टेक्टॉमी कहा जाता है, जिसमें पित्ताशय को हटाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस ऑपरेशन के बाद अधिकांश लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं।

लंबे समय तक पथरी रहने के संभावित खतरे

चिकित्सकों के मुताबिक यदि पित्ताशय की पथरी का इलाज नहीं कराया जाए तो बार-बार सूजन, संक्रमण और पित्त की नली में रुकावट जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में पीलिया, अग्न्याशय में सूजन और तेज पेट दर्द जैसी गंभीर परेशानियां भी सामने आ सकती हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में लंबे समय तक बनी रहने वाली पथरी गॉलब्लैडर कैंसर के जोखिम से भी जुड़ी मानी जाती है। हालांकि यह स्थिति सामान्य नहीं होती, फिर भी नियमित निगरानी और समय पर इलाज को सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

इन लक्षणों को हल्के में न लें

यदि लगातार पेट या कमर में तेज दर्द, बार-बार उल्टी, पीलिया, पेशाब से जुड़ी परेशानी या असामान्य तकलीफ महसूस हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। पित्ताशय की पथरी का पता लगाने के लिए आमतौर पर अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है। जांच के बाद डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवा या सर्जरी की सलाह देते हैं। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि पर्याप्त पानी पीना, संतुलित वजन बनाए रखना, नियमित व्यायाम करना और अत्यधिक नमक व प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन करना पथरी बनने के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।

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