LegalUpdate – मंदिर कर्मचारियों के वेतन मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बार चुनाव गिनती भी रुकी…
LegalUpdate – सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें राज्य सरकारों के अधीन संचालित मंदिरों में कार्यरत पुजारियों, सेवकों और अन्य कर्मचारियों के वेतन तथा सुविधाओं की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई थी। अदालत ने साफ कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस तरह की याचिका पर सीधे सुनवाई संभव नहीं है।

अदालत ने याचिकाकर्ता को दी वैकल्पिक कानूनी रास्ते की सलाह
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि कोई व्यक्ति या पक्ष वास्तव में प्रभावित है, तो वह उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर हस्तक्षेप करना न्यायिक दायरे में नहीं आता।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय को पीठ ने यह भी कहा कि मंदिरों से जुड़े पुजारियों और सेवदारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को जाने बिना व्यापक दावे करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत की टिप्पणी से साफ हुआ कि न्यायालय इस विषय को संवेदनशील सामाजिक और प्रशासनिक पहलू के रूप में देख रहा है।
हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट सहित कई उच्च न्यायालय पहले भी मंदिरों के पुजारियों को सम्मानजनक जीवन देने की आवश्यकता पर टिप्पणी कर चुके हैं। याचिका में यह मांग उठाई गई थी कि राज्य नियंत्रण वाले मंदिरों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। साथ ही अदालत ने यह स्पष्ट किया कि कानून के तहत उपलब्ध अन्य वैधानिक उपाय अपनाने पर कोई रोक नहीं है।
दिल्ली बार काउंसिल चुनाव मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनाव से जुड़े विवाद में भी अहम निर्देश जारी किए। अदालत ने चुनाव में कथित अनियमितताओं और छेड़छाड़ के आरोपों के बीच मतगणना की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने बिरेंद्र सांगवान और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले को दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ के पास भेजते हुए कहा कि इसकी सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित की जाए।
हाईकोर्ट को रोजाना सुनवाई करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले में निर्णय नहीं दे देता, तब तक मतपत्रों की आगे की गिनती नहीं की जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के तथ्यों और आरोपों पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है।
पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिदिन सुनवाई सुनिश्चित की जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि बार चुनाव की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
दोनों मामलों में न्यायिक संतुलन पर जोर
सोमवार को आए इन दोनों मामलों के आदेशों से यह संकेत मिला कि सुप्रीम कोर्ट संवेदनशील मामलों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से पहले वैधानिक प्रक्रिया और संबंधित मंचों की भूमिका को प्राथमिकता दे रहा है। चाहे मंदिर कर्मचारियों के अधिकारों का मामला हो या बार चुनाव की पारदर्शिता का प्रश्न, अदालत ने संस्थागत प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया।