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KolkataAirport – एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में प्रवेश रोक पर तेज हुई सुरक्षा बहस

KolkataAirport – कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के परिसर में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद में अस्थायी रूप से प्रवेश और सामूहिक नमाज पर रोक लगाए जाने के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन ने इस कदम के पीछे सुरक्षा और मरम्मत कार्य को वजह बताया है। वहीं, इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए प्रशासन के निर्णय का समर्थन किया है।

सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर मुख्यमंत्री का जोर

पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है और इसकी सुरक्षा किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट की भौगोलिक स्थिति इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित है। ऐसे में उच्च सुरक्षा वाले परिसर में बाहरी लोगों की निर्बाध आवाजाही की अनुमति देना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

धार्मिक स्वतंत्रता पर सरकार का पक्ष

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार किसी भी समुदाय के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर रही है। उनके अनुसार, सभी धार्मिक आयोजनों को कानून के दायरे में रहकर आयोजित करने की अनुमति दी जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल के धार्मिक पर्व भी प्रशासनिक नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा नियमों का भी सम्मान किया जाए।

मस्जिद समिति ने फैसले पर जताई आपत्ति

दूसरी ओर, मस्जिद समिति के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सिद्दीकउल्लाह चौधरी ने प्रवेश रोक पर असहमति जताई है। उनका कहना है कि एयरपोर्ट परिसर में स्थित यह मस्जिद एक सदी से अधिक पुरानी है और स्थानीय लोगों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस स्थान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रक्रिया चल रही थी, तब भी बिना पूर्व सूचना के प्रवेश प्रतिबंध लागू करना उचित नहीं था। उन्होंने प्रशासन से इस विषय पर संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

मुख्यमंत्री ने मस्जिद समिति की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में निर्णय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

भाजपा विधायक ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

दमदम उत्तर से भाजपा विधायक सौरव सिकदर ने दावा किया कि एयरपोर्ट के उच्च सुरक्षा क्षेत्र में स्थित इस मस्जिद के कारण सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। उनके अनुसार, एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश करने वाले अधिकांश लोगों के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया और पहचान सत्यापन अनिवार्य होता है। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा जांच सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार के जोखिम से बचा जा सके।

प्रशासन ने बताई अस्थायी रोक की वजह

एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के भीतर स्थित गौरीपुर जामा मस्जिद, जिसे स्थानीय स्तर पर बांकरा मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है, में मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य चल रहा है। इसी कारण कुछ दिनों के लिए प्रवेश और सामूहिक नमाज पर अस्थायी रोक लगाई गई है। प्रशासन का कहना है कि कार्य पूरा होने के बाद आगे की व्यवस्था परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी।

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