KhalistanIssue – भारत की चिंताओं पर ऑस्ट्रेलिया ने दिया सख्त और स्पष्ट रुख
KhalistanIssue – ऑस्ट्रेलिया ने खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर भारत की ओर से जताई गई चिंताओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह भारत की क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान करता है। भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति जरूर है, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा या गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की चिंताओं को गंभीरता से लेने का दावा
एक मीडिया बातचीत के दौरान फिलिप ग्रीन ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को पूरी गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस, खुफिया एजेंसियां और विदेश नीति से जुड़ी संस्थाएं इस विषय पर लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। उनके अनुसार, ऑस्ट्रेलिया किसी भी अलगाववादी एजेंडे का समर्थन नहीं करता और कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
ग्रीन ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया बहुसांस्कृतिक समाज वाला देश है, जहां अलग-अलग समुदायों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कानून तोड़ने की छूट भी दी जाएगी।
प्रदर्शन और कानून व्यवस्था पर स्पष्ट संदेश
ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने कहा कि उनके देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा हैं। लोग अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख सकते हैं, लेकिन किसी भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा, डर फैलाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।
उन्होंने संकेत दिया कि यदि कोई समूह कानून के दायरे से बाहर जाकर गतिविधियां करता है, तो संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी। हाल के वर्षों में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर भारत ने कई बार अपनी चिंता जताई थी, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया की यह प्रतिक्रिया अहम मानी जा रही है।
सिडनी में जनमत संग्रह कार्यक्रम के बाद बढ़ा था विवाद
साल 2023 में सिडनी के मिंचिनबरी इलाके में आयोजित एक तथाकथित जनमत संग्रह कार्यक्रम के बाद विवाद तेज हो गया था। यह आयोजन खालिस्तान समर्थक समूहों द्वारा किया गया था, जिसका कई संगठनों और समुदायों ने विरोध किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटना के बाद सिख और हिंदू समुदायों के बीच तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई थीं।
ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने उस समय भी कहा था कि वह किसी भी सामुदायिक तनाव को नियंत्रित करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतर्क है। अब राजदूत के हालिया बयान को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
भारतीय नागरिकों की डिपोर्टेशन पर भी दी सफाई
हाल ही में कुछ भारतीय नागरिकों को ऑस्ट्रेलिया से वापस भेजे जाने के मामले पर भी फिलिप ग्रीन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई वीजा नियमों के तहत की गई है और इसका किसी विशेष समुदाय या देश से संबंध नहीं है। उनके मुताबिक, हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और पर्यटक ऑस्ट्रेलिया आते हैं और अधिकांश लोग नियमों का पालन करते हैं।
ग्रीन ने कहा कि जिन लोगों की वीजा अवधि समाप्त हो जाती है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत देश छोड़ना पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की आव्रजन नीति स्पष्ट और नियम आधारित है।
पंजाब से जुड़े लोगों की संख्या अधिक
पंजाब सरकार के अनुसार, हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से वापस भेजे गए 15 भारतीय नागरिकों में 11 लोग पंजाब के निवासी थे। इनमें 10 पुरुष और एक महिला शामिल हैं। राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचकर इन लोगों को रिसीव किया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मामले की जानकारी साझा की थी। माना जा रहा है कि भविष्य में विदेश जाने वाले युवाओं के लिए वीजा और इमिग्रेशन नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।