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HealthResearch – स्वास्थ्य अनुसंधान निवेश बढ़ाने की तैयारी, 2047 तक बड़ा लक्ष्य तय…

HealthResearch – केंद्र सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान को नई दिशा देने की तैयारी में है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति-2026 के मसौदे में वर्ष 2047 तक स्वास्थ्य अनुसंधान पर होने वाले सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। नीति का उद्देश्य केवल शोध गतिविधियों को बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी वैज्ञानिक खोजों को प्रोत्साहित करना है जिनका लाभ सीधे मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सके।

गंभीर बीमारियों पर रहेगा अनुसंधान का मुख्य फोकस

प्रस्तावित नीति के अनुसार, आने वाले वर्षों में कैंसर, क्षय रोग (टीबी), मधुमेह, हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, संक्रामक रोग और बुजुर्गों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडा तैयार करेगी, ताकि देश की जरूरतों के अनुसार अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सके।

अनुसंधान खर्च बढ़ाने का प्रस्ताव

मसौदा नीति में स्वास्थ्य अनुसंधान पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में निवेश बढ़ाने का रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान स्तर की तुलना में वर्ष 2037 तक इस निवेश को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने और 2047 तक इसे 0.15 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि बेहतर वित्तीय सहयोग से अनुसंधान की गुणवत्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को गति मिलेगी।

मेडिकल कॉलेजों में मजबूत होगा रिसर्च नेटवर्क

नीति के तहत देशभर के मेडिकल कॉलेजों में मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) का विस्तार करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही मौजूदा वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब (VRDL) को उन्नत कर इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब (IRDL) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे वायरस के अलावा बैक्टीरिया, फंगस और अन्य संक्रामक रोगों पर भी व्यापक अनुसंधान किया जा सकेगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के संस्थानों को इस नेटवर्क का प्रमुख आधार बनाने की योजना है।

स्वदेशी दवाओं और नई तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने मसौदा नीति में स्टार्टअप, उद्योग, मेडिकल संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य देश में नई दवाओं, वैक्सीन, मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक किट के स्वदेशी विकास को प्रोत्साहन देना है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीनोमिक्स, डिजिटल हेल्थ डेटा और राष्ट्रीय रोग रजिस्ट्रियों के उपयोग को भी अनुसंधान प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

शोध के मूल्यांकन का तरीका भी बदलेगा

नई नीति में केवल शोध पत्रों की संख्या को सफलता का आधार नहीं माना जाएगा। इसके बजाय यह देखा जाएगा कि किसी अनुसंधान से नई चिकित्सा तकनीक विकसित हुई या नहीं, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आया या नहीं और मरीजों को वास्तविक लाभ मिला या नहीं। इसी उद्देश्य से ICMR-IRIS नामक नया मूल्यांकन ढांचा विकसित करने का प्रस्ताव है। साथ ही राज्यों से भी स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए अलग फंड स्थापित करने और निवेश बढ़ाने का आग्रह किया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के निवेश की समय-समय पर समीक्षा कर निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति का आकलन किया जाएगा।

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