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ForeignPolicy – अमेरिकी बयान पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से उठाए सवाल

ForeignPolicy – कांग्रेस ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के हालिया बयान को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने सवाल उठाया कि भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़ी घोषणाएं अमेरिकी अधिकारियों द्वारा पहले क्यों की जा रही हैं। यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई जिसमें रुबियो ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति की प्रस्तावित भारत यात्रा का उल्लेख किया था।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि भारत से जुड़े अहम कूटनीतिक मामलों की जानकारी अमेरिकी अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति की संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा बताया।

वेनेजुएला यात्रा को लेकर उठा विवाद

मार्को रुबियो ने हाल ही में मियामी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान क्वाड बैठक और वेनेजुएला के राष्ट्रपति की भारत यात्रा का जिक्र किया था। कांग्रेस का कहना है कि इस यात्रा की औपचारिक पुष्टि भारत या वेनेजुएला की ओर से होने से पहले अमेरिकी विदेश सचिव द्वारा इसका उल्लेख किया जाना असामान्य है।

जानकारी के अनुसार, वेनेजुएला के राष्ट्रपति को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस कार्यक्रम में शामिल होना था। हालांकि बाद में अफ्रीका में इबोला वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।

कांग्रेस ने पुराने बयान का भी किया जिक्र

जयराम रमेश ने अपने बयान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मार्को रुबियो ने 10 मई 2025 को इस अभियान के रुकने की जानकारी सार्वजनिक की थी। कांग्रेस का आरोप है कि कई बार भारत से जुड़े अहम फैसलों या घटनाओं पर अमेरिकी पक्ष पहले प्रतिक्रिया देता दिखाई देता है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि यह स्थिति कूटनीतिक दृष्टि से असहज करने वाली है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी आधिकारिक जानकारी और घोषणाओं पर अधिक नियंत्रण रखने की जरूरत है।

विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज

कांग्रेस ने इस मुद्दे को भारतीय संप्रभुता और विदेश नीति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि किसी भी देश की विदेश नीति से संबंधित सूचनाएं उसकी अपनी सरकार द्वारा सार्वजनिक की जानी चाहिए।

हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच बहस पहले भी होती रही है, लेकिन इस बार मामला अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं की टाइमिंग को लेकर चर्चा में है।

कूटनीतिक संकेतों पर बनी नजर

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, लेकिन विपक्ष का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर होने वाली घोषणाओं में संतुलन और प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि विदेशी अधिकारी भारत से जुड़े मामलों पर पहले जानकारी देते हैं तो इससे देश की कूटनीतिक स्थिति को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी।

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