CBSEControversy – ओएसएम प्रणाली विवाद पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
CBSEControversy – सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि परीक्षा मूल्यांकन से जुड़ी इस तकनीकी समस्या के कारण बड़ी संख्या में छात्रों और उनके परिवारों को चिंता और असमंजस का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग भी की है।

कांग्रेस ने उठाए जवाबदेही से जुड़े सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि लंबे समय तक साइबर सुरक्षा संबंधी कमियों से इनकार करने के बाद सीबीएसई ने अंततः यह स्वीकार किया है कि उसका OSM सिस्टम प्रभावित हुआ था। उन्होंने सवाल किया कि इस मामले में तकनीकी सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी COEMPT के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
निविदा शर्तों में बदलाव पर विपक्ष की आपत्ति
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि अगस्त 2025 में जारी निविदा दस्तावेज में ऐसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान था जो निर्धारित मानकों पर खरी न उतरें। उनके अनुसार बाद में इस प्रावधान में बदलाव किया गया, जिससे संबंधित कंपनी को लाभ पहुंचाने की आशंका पैदा हुई। कांग्रेस ने इस संशोधन की प्रक्रिया और उसके कारणों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
शिक्षा मंत्री पर विपक्ष का निशाना
कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे प्रकरण को शिक्षा प्रशासन की विफलता से जोड़ते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि छात्रों से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई अपेक्षित थी। इसी आधार पर कांग्रेस ने मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग की है।
पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी उठा था विवाद
इस विवाद से पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे जुड़े शुल्क के मुद्दे पर सरकार की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि शिक्षा व्यवस्था में छात्रों की सुविधा और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि यदि व्यवस्था में खामियां हों तो उन्हें समय रहते सुधारना आवश्यक है।
छात्रों की शिकायतों के बाद बढ़ा मामला
विवाद तब और गहरा गया जब कक्षा 12 के कुछ छात्रों ने शिकायत की कि पुनर्मूल्यांकन के दौरान पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी नहीं थीं। इस मुद्दे के सामने आने के बाद सीबीएसई ने प्रभावित छात्रों से संपर्क किया और उन्हें उनकी वास्तविक उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं। बोर्ड की ओर से मामले को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात भी कही गई।
विशेषज्ञों की मदद से जांच जारी
मामले की तकनीकी जांच के लिए आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मूल्यांकन पोर्टल और भुगतान प्रणाली की सुरक्षा को और मजबूत बनाने पर भी काम चल रहा है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।
तकनीकी कंपनी को लेकर भी उठ रहे प्रश्न
विवाद के केंद्र में रही कंपनी COEMPT को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि कंपनी अपने पूर्व नाम ग्लोबअरीना के समय से ही विभिन्न विवादों में चर्चा में रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक जांच की प्रक्रिया जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने का इंतजार किया जा रहा है।