राष्ट्रीय

AirCrash – अहमदाबाद विमान हादसे में पायलट को लेकर सामने आया ये नया दावा

AirCrash – अहमदाबाद में पिछले वर्ष हुए एयर इंडिया विमान हादसे को लेकर एक नया दावा सामने आने के बाद मामले पर फिर चर्चा तेज हो गई है। इस दुर्घटना में अपने परिवार के तीन सदस्यों को खोने वाले खेड़ा निवासी रोमिन वोहरा ने दावा किया है कि उन्होंने अस्पताल की मॉर्चरी में कैप्टन सुमीत सभरवाल का शव ऐसी स्थिति में देखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि पायलट आखिरी क्षण तक विमान को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे।

रोमिन वोहरा ने बताया कि मेडिकल क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उन्हें हादसे के अगले दिन अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मुर्दाघर तक पहुंचने की अनुमति मिली थी। उनके अनुसार, कैप्टन का शव अलग रखा गया था और उनकी शारीरिक स्थिति ऐसी लग रही थी जैसे वे विमान की सीट पर बैठे हों और कंट्रोल संभाले हुए हों। इस दावे ने हादसे से जुड़ी शुरुआती जांच और पायलटों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

हादसे के बाद सामने आया नया बयान

रोमिन वोहरा पेशे से लैब टेक्नीशियन हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कैप्टन सभरवाल का शव देखा, तब उनके हाथ आगे की ओर फैले हुए थे और शरीर की मुद्रा ऐसी थी मानो वे विमान का नियंत्रण पकड़े हुए हों। उन्होंने कहा कि शव काफी सख्त अवस्था में था और पैर भी मुड़े हुए दिखाई दे रहे थे।

वोहरा के मुताबिक, कैप्टन ने अपनी आधिकारिक वर्दी पहन रखी थी, जिससे उनकी पहचान करना आसान हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि शरीर का पिछला हिस्सा अधिक झुलसा हुआ था, जबकि चेहरा और आगे का हिस्सा अपेक्षाकृत कम प्रभावित दिखाई दे रहा था। बाद में तस्वीरों के माध्यम से भी उन्होंने पहचान की पुष्टि की।

जून 2025 में हुआ था भीषण विमान हादसा

यह हादसा 12 जून 2025 को हुआ था, जब एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुई थी। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद विमान मेघानीनगर इलाके में स्थित एक हॉस्टल परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित जमीन पर मौजूद कई लोगों की भी जान चली गई थी। दुर्घटना में केवल एक यात्री जीवित बच पाया था।

विमान को कैप्टन सुमीत सभरवाल और सह-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंडर उड़ा रहे थे। हादसे के बाद विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने तकनीकी जांच शुरू की थी, जिसकी शुरुआती रिपोर्ट जुलाई 2025 में जारी की गई थी।

शुरुआती जांच रिपोर्ट पर उठे थे सवाल

जांच एजेंसी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया था कि टेक-ऑफ के कुछ सेकंड बाद विमान के इंजन से जुड़े फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे। कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से इस बारे में सवाल पूछता सुनाई दिया था। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और विमानन विशेषज्ञों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

हालांकि, पायलटों के परिवारों और कुछ विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट के निष्कर्षों पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि पूरी तकनीकी जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अब रोमिन वोहरा के दावे के बाद मामले को लेकर फिर से नई बहस शुरू हो गई है।

निष्पक्ष जांच की मांग तेज

इस मामले में अमेरिका की कानूनी फर्म चियोनुमा लॉ ने भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। बताया गया है कि यह फर्म दुर्घटना से प्रभावित 100 से अधिक परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रही है। फर्म का कहना है कि यदि पायलट अंतिम समय तक नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे, तो हादसे के तकनीकी कारणों की दोबारा गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष पर जिम्मेदारी तय करने से पहले सभी तकनीकी और मानवीय पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट भी पहले स्पष्ट कर चुका है कि हादसे के लिए आधिकारिक रूप से किसी पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया है।

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