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Begum Khaleda Zia Passing: बांग्लादेश की राजनीति का एक युग समाप्त, बेगम खालिदा जिया की अंतिम विदाई पर सामने आया पीएम मोदी का संदेश

Begum Khaleda Zia Passing: बांग्लादेश की राजनीति में दशकों तक अपनी धमक बनाए रखने वाली और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया अब हमारे बीच नहीं रहीं। मंगलवार की सुबह ढाका से आई इस दुखद खबर ने पूरे विश्व के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ानी शुरू कर दी है। खालिदा जिया का व्यक्तित्व (South Asian Politics) में इतना प्रभावशाली रहा कि उनके निधन को एक पूरे युग के अवसान के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने न केवल अपने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूती दी, बल्कि महिलाओं के लिए राजनीति के बंद दरवाजे भी खोले।

Begum Khaleda Zia Passing
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मार्मिक श्रद्धांजलि और पुरानी यादें

खालिदा जिया के निधन (Begum Khaleda Zia Passing) की खबर मिलते ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना गहरा शोक प्रकट किया। पीएम मोदी ने अपने संदेश में ढाका की उन यादों को ताजा किया जब 2015 में उनकी मुलाकात (Bilateral Relations) को मजबूत करने के उद्देश्य से पूर्व प्रधानमंत्री से हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि खालिदा जिया का भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने में जो योगदान रहा है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने शोक संतप्त परिवार और बांग्लादेश की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं।


बीमारियों से लंबी जंग और ढाका के अस्पताल में अंतिम सांस

बेगम खालिदा जिया पिछले काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं और 80 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्हें फेफड़ों में संक्रमण के चलते ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ (Advanced Medical Treatment) के जरिए उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे थे। वह हृदय रोग, लिवर सिरोसिस, मधुमेह और किडनी से जुड़ी बीमारियों से लंबे समय से संघर्ष कर रही थीं। डॉक्टरों की एक बड़ी टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी, लेकिन उम्र और बीमारियों के जटिल जाल ने उन्हें कमजोर कर दिया था।


लंदन से वापसी और अस्पताल के बाहर उमड़ा समर्थकों का सैलाब

दिसंबर महीने की शुरुआत में ही बेगम जिया को बेहतर इलाज के लिए लंदन भेजा गया था, लेकिन उनकी स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो सका। जैसे ही उनके निधन की खबर फैली, अस्पताल के बाहर हजारों समर्थकों की भीड़ जमा हो गई। इस दुखद घड़ी में (Political Leadership) की कमान संभाल रहे उनके बेटे और बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान अपनी मां को अंतिम श्रद्धांजलि देने अस्पताल पहुंचे। वहां मौजूद समर्थकों की आंखों में अपने नेता को खोने का गम साफ झलक रहा था, जो घंटों से उनकी सलामती की दुआएं मांग रहे थे।


फज्र की नमाज के बाद हुआ शांत और शाश्वत विदा

बीएनपी की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, बेगम खालिदा जिया का निधन स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 6 बजे फज्र की नमाज के तुरंत बाद हुआ। पार्टी ने अपने बयान में समर्थकों से उनकी आत्मा की शांति के लिए (National Mourning) के तौर पर प्रार्थना करने का आग्रह किया है। पार्टी ने कहा कि देश ने एक ऐसी मार्गदर्शक खो दी है जिसने हमेशा बांग्लादेश के विकास और जनता के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उनकी कमी को पूरा करना बांग्लादेश की राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।


भारत-बांग्लादेश साझेदारी में खालिदा जिया की अनमोल विरासत

पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में इस बात पर जोर दिया कि खालिदा जिया की सोच और उनकी विरासत आने वाले समय में भी दोनों देशों की साझेदारी को राह दिखाती रहेगी। उन्होंने (Strategic Partnership) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जिस तरह के कूटनीतिक प्रयास किए थे, वे आज भी प्रासंगिक हैं। भारत के प्रति उनका दृष्टिकोण हमेशा सहयोगात्मक रहा, जिससे सीमा सुरक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में काफी प्रगति हुई थी। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि उनके द्वारा बोए गए दोस्ती के बीज भविष्य में और भी फलेंगे-फूलेंगे।


एक संघर्षपूर्ण जीवन और लोकतंत्र के प्रति अटूट निष्ठा

खालिदा जिया का जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा, जहां उन्होंने कई बार जेल की सजा काटी और राजनीतिक निर्वासन भी झेला। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) को टूटने नहीं दिया और हमेशा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया। उनके समर्थकों के लिए वह केवल एक नेता नहीं बल्कि ‘देशनेत्री’ थीं। उन्होंने बांग्लादेश को विकासशील देशों की श्रेणी में लाने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी नीतियां लागू की थीं, जिनका लाभ आज भी वहां की जनता को मिल रहा है।


वैश्विक नेताओं का शोक और एक अपूरणीय क्षति

केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कई बड़े नेताओं ने खालिदा जिया के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्हें एक ऐसी महिला के रूप में याद किया जा रहा है जिसने रूढ़िवादी समाज में अपनी जगह बनाई और प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचीं। उनकी (Global Political Influence) की वजह से ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काफी सम्मान मिलता था। बांग्लादेश के इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा, और उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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