HealthReport – देश में तेजी से बढ़ीं दिल की बीमारियां, नई रिपोर्ट में हुआ खुलासा
HealthReport – राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ताजा स्वास्थ्य रिपोर्ट देश में बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहां संक्रामक बीमारियों में कुछ कमी दर्ज की गई है, वहीं हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। खास बात यह है कि अब इन बीमारियों का असर युवाओं पर भी दिखने लगा है, जो पहले अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते थे।

यह रिपोर्ट जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसमें देशभर के लोगों के स्वास्थ्य, इलाज और खर्च से जुड़े आंकड़े शामिल किए गए हैं।
बीमारियों के कुल आंकड़ों से क्या संकेत मिलते हैं
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 15 दिनों के भीतर करीब 13.1 प्रतिशत आबादी किसी न किसी बीमारी से प्रभावित रही। प्रति एक लाख लोगों पर कुल 15,217 मामलों का आंकड़ा सामने आया, जिससे यह संकेत मिलता है कि कई लोगों को एक साथ एक से अधिक स्वास्थ्य समस्याएं थीं।
महिलाओं में बीमारी की दर पुरुषों की तुलना में अधिक दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, प्रति एक लाख महिलाओं में 17,006 मामले सामने आए, जबकि पुरुषों में यह संख्या 13,504 रही।
शहरों में बीमारी का अनुपात अधिक
स्वास्थ्य सर्वेक्षण में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच भी स्पष्ट अंतर देखने को मिला। शहरों में लगभग 14.9 प्रतिशत लोग बीमार पाए गए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 12.2 प्रतिशत रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी जीवनशैली, तनाव, खानपान की आदतें और प्रदूषण जैसे कारक इस अंतर की वजह हो सकते हैं। साथ ही, शहरों में स्वास्थ्य जांच की बेहतर सुविधा होने से मामलों की पहचान भी ज्यादा होती है।
बच्चों और युवाओं में अलग-अलग पैटर्न
रिपोर्ट के अनुसार, 0 से 14 वर्ष तक के बच्चों में संक्रमण और सांस से जुड़ी बीमारियां सबसे अधिक पाई गईं। बुखार, खांसी और गले के संक्रमण इस आयु वर्ग में प्रमुख समस्याएं हैं।
वहीं, 15 से 29 वर्ष के युवाओं में भी संक्रमण प्रमुख रहा, लेकिन इसके साथ मानसिक स्वास्थ्य और पेट से जुड़ी समस्याओं में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि युवा वर्ग नई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहा है।
बुजुर्गों में बीमारी का खतरा ज्यादा
आंकड़े बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ बीमारी का जोखिम भी तेजी से बढ़ता है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 42 से 45 प्रतिशत लोगों ने खुद को बीमार बताया, जो अन्य आयु वर्गों की तुलना में काफी अधिक है।
45 से 59 वर्ष के आयु वर्ग में भी 20 से 25 प्रतिशत लोग बीमार पाए गए। इसके विपरीत, 15 से 29 वर्ष के युवाओं में बीमारी की दर सबसे कम, करीब 4 से 5 प्रतिशत रही। छोटे बच्चों में यह आंकड़ा 9 से 10 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया।
दिल की बीमारियों में चिंताजनक बढ़ोतरी
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू हृदय रोगों में आई तेजी से वृद्धि है। पिछले सात वर्षों में इन मामलों की संख्या लगभग तीन गुना बढ़कर प्रति एक लाख आबादी पर 3,891 तक पहुंच गई है। 2017-18 में यह आंकड़ा 1,333 था।
कुल बीमारियों में हृदय रोगों की हिस्सेदारी 25.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो इसे सबसे बड़ा स्वास्थ्य खतरा बनाती है।
उम्र के साथ बढ़ता जोखिम
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि उम्र बढ़ने के साथ दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता है। जहां छोटे बच्चों में इसका प्रतिशत बेहद कम है, वहीं 30 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में यह काफी बढ़ जाता है।
45 से 59 वर्ष के लोगों में यह हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक है, जबकि 60 वर्ष से ऊपर के लोगों में यह लगभग 38 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।
संक्रमण में कमी, लेकिन चुनौती बनी हुई
हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि संक्रमण से जुड़ी बीमारियों के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। 2017-18 में जहां प्रति एक लाख आबादी पर 2,547 मामले थे, वहीं 2025 में यह घटकर 2,302 रह गए।
इसके बावजूद, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच गैर-संक्रामक बीमारियों पर ध्यान देना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।