FoodSafety – भ्रामक दावों और लेबलिंग पर FSSAI सख्त, तीन कंपनियों से सात दिन में जवाब तलब…
FoodSafety- देश में खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और उन पर किए जाने वाले दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त कदम उठाया है। नियामक संस्था ने लोट्टे इंडिया, फर्न्स एन पेटल्स और कुबेरा फूड्स को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। FSSAI का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कुछ उत्पादों पर ऐसे दावे और लेबलिंग संबंधी कमियां सामने आई हैं, जिनसे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की आशंका बन सकती है।

उपभोक्ताओं के हित में कार्रवाई
FSSAI के अनुसार, खाद्य उत्पादों पर दी जाने वाली जानकारी पूरी तरह सही, स्पष्ट और नियमों के अनुरूप होना आवश्यक है। यदि किसी कंपनी की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्राधिकरण का कहना है कि उसका उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता बनाए रखना और उपभोक्ताओं तक सही जानकारी पहुंचाना है। हाल के महीनों में संस्था ने शिकायतों और स्वत: संज्ञान के आधार पर कई मामलों की जांच तेज की है।
लोट्टे इंडिया के उत्पादों में क्या मिलीं कमियां
नियामक संस्था के मुताबिक, लोट्टे इंडिया के कुछ उत्पादों में लेबलिंग से जुड़े कई नियमों के पालन में कमी पाई गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी ने कुछ उत्पादों पर पुराने नाम वाले पहले से मुद्रित लेबल का उपयोग आवश्यक अनुमति के बिना किया। इसके अलावा लोट्टे चॉको पाय पर किया गया 100 प्रतिशत शाकाहारी होने का दावा भी जांच के दायरे में आया है। वहीं, पीईपीईआरओ बिस्किट स्टिक्स पर निर्धारित प्रारूप के अनुसार पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। लॉली ब्लिस लॉलीपॉप में विटामिन संबंधी मानकों के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। FSSAI ने यह भी कहा कि कुछ पैकेजिंग ऐसी थी, जिससे उत्पाद में फल होने का आभास मिलता था, जबकि वास्तविक सामग्री इससे मेल नहीं खाती थी। साथ ही आवश्यक डिस्क्लेमर भी सामने की ओर प्रदर्शित नहीं किया गया।
कुबेरा फूड्स और फर्न्स एन पेटल्स पर भी सवाल
कुबेरा फूड्स के सॉफ्ट एंड फ्रेश क्रीम बन पाइनएप्पल उत्पाद पर “100 प्रतिशत नेचुरल” और “नो प्रिजरवेटिव्स” जैसे दावे किए गए थे। हालांकि, लेबल की जांच में संरक्षक, कृत्रिम रंग और फ्लेवरिंग पदार्थों का उल्लेख भी दर्ज मिला। FSSAI का मानना है कि ऐसी स्थिति में “नेचुरल”, “फ्रेश” और “प्योर” जैसे दावों का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, फर्न्स एन पेटल्स के रोस्टेड ऑलमंड चॉकलेट उत्पाद पर “प्रीमियम चॉकलेट” लिखा गया था, जबकि उसमें हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल फैट के उपयोग की बात सामने आई। इसके अलावा अनुशंसित दैनिक पोषण मात्रा (RDA) और सामग्री संबंधी जानकारी भी पूरी तरह नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई।
लगातार बढ़ रही निगरानी
FSSAI का कहना है कि खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले दावों और वास्तविक सामग्री के बीच किसी भी तरह का अंतर उपभोक्ताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से संस्था लेबलिंग और विज्ञापनों से जुड़े मामलों की लगातार निगरानी कर रही है। हाल ही में “फ्रेश पनीर” जैसे दावों को लेकर भी एक अन्य कंपनी को नोटिस जारी किया गया था। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं से मिलने वाली शिकायतों और स्वत: संज्ञान के आधार पर आगे भी जांच जारी रहेगी, ताकि बाजार में उपलब्ध खाद्य उत्पाद तय मानकों का पालन करें और ग्राहकों को सही जानकारी मिल सके।