FluorideCrisis – मुंगेर के गांव में दूषित पानी से बढ़ीं मौतें और अपंगता
FluorideCrisis – बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड स्थित दूधपनियां गांव में फ्लोराइडयुक्त पानी का असर लगातार लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। गांव में कई परिवार वर्षों से दूषित पानी के कारण गंभीर बीमारियों और शारीरिक विकलांगता का सामना कर रहे हैं। हाल ही में फ्लोराइड से प्रभावित 29 वर्षीय ललिता बेसरा की मौत के बाद एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और राहत कार्यों पर सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से फ्लोराइड मिला पानी पीने के कारण लोग धीरे-धीरे बीमार हो रहे हैं। कई परिवारों में सदस्य चलने-फिरने में असमर्थ हो चुके हैं, जबकि कुछ लोग बिस्तर पर जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
शुद्ध पानी की व्यवस्था के बाद भी परेशानी कायम
जिलाधिकारी के निर्देश पर कुछ समय पहले लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत फ्लोराइडयुक्त चापाकलों को हटाने और सुरक्षित पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि इससे कुछ हद तक राहत जरूर मिली है, लेकिन जो लोग पहले से फ्लोराइड की चपेट में आ चुके हैं, उनके इलाज और पुनर्वास की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
गांव के कई प्रभावित परिवारों का आरोप है कि शुरुआती प्रशासनिक सक्रियता के बाद अधिकारी दोबारा हाल जानने तक नहीं पहुंचे। गंभीर रूप से बीमार लोगों को आज भी समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।
एक ही परिवार में दो मौतों से बढ़ी चिंता
दूधपनियां गांव में हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही परिवार में दो महीने के भीतर पिता और बेटी की मौत हो गई। कुछ समय पहले विनोद बेसरा का निधन हुआ था और अब उनकी बेटी ललिता बेसरा ने भी दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों के अनुसार, ललिता लंबे समय से फ्लोराइड के प्रभाव से उत्पन्न शारीरिक समस्याओं से जूझ रही थीं। उनका चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया था। गांव के लोगों का कहना है कि परिवार आर्थिक रूप से भी कमजोर था और बेहतर इलाज नहीं करा सका।
प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल
जनवरी महीने में जिलाधिकारी निखिल धनराज निपनिकर गांव पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर राहत और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। गांव में स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया था और विशेष सहायता नीति के तहत मदद देने की बात कही गई थी।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआती दौर के बाद प्रशासनिक गतिविधियां लगभग थम गईं। गांव में न तो नियमित स्वास्थ्य जांच हो रही है और न ही गंभीर मरीजों के इलाज की प्रभावी व्यवस्था दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार हो रही मौतों और बीमारियों के कारण गांव में भय और नाराजगी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित परिवारों के लिए विशेष चिकित्सा सहायता, आर्थिक मदद और पुनर्वास योजना लागू की जाए। उनका कहना है कि केवल साफ पानी उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहले से प्रभावित लोगों के इलाज पर भी ध्यान देना जरूरी है।
सामाजिक स्तर पर मिली मदद
ललिता बेसरा की मौत की सूचना मिलने के बाद पूर्व मुखिया प्रतिनिधि संजय मंडल ने परिवार को निजी स्तर पर आर्थिक सहायता दी। उन्होंने मृतका के परिजनों को दो हजार रुपये की मदद प्रदान की। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या इतनी बड़ी है कि इसके समाधान के लिए व्यापक सरकारी हस्तक्षेप जरूरी है।