बिहार

BridgeCollapse – जर्जर पुल बंद होने से नालंदा-शेखपुरा के लोगों की बढ़ी मुश्किलें, अधूरा डायवर्जन बना चिंता

BridgeCollapse – नालंदा और शेखपुरा जिले के बीच आवागमन का अहम माध्यम रहा बिहारशरीफ-कतरीसराय मार्ग इन दिनों लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। दरियापुर के समीप सकरी नदी पर स्थित पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर करीब दो महीने पहले इसके दोनों सिरों को ईंट की दीवार बनाकर बंद कर दिया था। हालांकि, इसके विकल्प के रूप में तैयार किया जा रहा डायवर्जन अब तक पूरी तरह उपयोग के लिए तैयार नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अधूरा डायवर्जन बना जोखिम का कारण

पुल बंद होने के बाद नदी के भीतर ह्यूम पाइप लगाकर अस्थायी रास्ता तैयार किया गया, लेकिन उसे मुख्य सड़क से जोड़ने वाले दोनों एप्रोच मार्ग अब भी कच्चे हैं। लगातार हो रही बारिश से इन रास्तों पर कीचड़ फैल गया है, जिससे दोपहिया और साइकिल चालकों के लिए आवागमन मुश्किल हो गया है। फिसलन के कारण छोटे-छोटे हादसे भी सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ा, तो यह अस्थायी मार्ग बह सकता है और आवाजाही पूरी तरह ठप होने की आशंका है।

बढ़ी दूरी से समय और खर्च दोनों में इजाफा

पुल बंद होने का असर आसपास के कई गांवों पर साफ दिखाई दे रहा है। मानपुर, पलनी, रहिंचा, कबीरपुर, मैरा और बरीठ सहित कई इलाकों का बिहारशरीफ से सीधा संपर्क बाधित हो गया है। पहले जहां जिला मुख्यालय तक पहुंचने में लगभग 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब लोगों को गिरियक-पावापुरी मार्ग से 35 से 40 किलोमीटर या अस्थावां होकर 22 से 25 किलोमीटर का लंबा सफर करना पड़ रहा है। इससे यात्रा का समय बढ़ने के साथ ईंधन और परिवहन पर होने वाला खर्च भी बढ़ गया है।

क्षतिग्रस्त पुल से गुजरने को मजबूर लोग

डायवर्जन की खराब स्थिति के चलते कई लोगों ने बंद किए गए पुल के एक हिस्से पर बनी ईंट की दीवार को हटाकर फिर से आवाजाही शुरू कर दी है। स्थानीय निवासी और बाइक सवार मजबूरी में उसी जर्जर पुल का उपयोग कर रहे हैं, जबकि उसकी स्थिति पहले से ही असुरक्षित बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

ग्रामीणों ने निर्माण और रखरखाव पर उठाए सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सकरी नदी पर बना यह पुल अपेक्षाकृत कम समय में ही खराब स्थिति में पहुंच गया। उनका कहना है कि पुल के पिलरों के आसपास कथित अवैध बालू खनन से इसकी नींव प्रभावित हुई, जबकि दो वर्ष पहले आई बाढ़ ने भी संरचना को नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर मरम्मत और आवश्यक रखरखाव नहीं होने से पिलर धंस गए, जिसके बाद पुल को यातायात के लिए बंद करना पड़ा। अब लोग प्रशासन से सुरक्षित और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि क्षेत्र की सामान्य आवाजाही जल्द बहाल हो सके।

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