RajajiTigerReserve – सड़क चौड़ीकरण योजना पर WII की आपत्ति, नए विकल्पों पर किया मंथन
RajajiTigerReserve– उत्तराखंड में राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले पीपलकोटी-पशुलोक बैराज मार्ग के प्रस्तावित चौड़ीकरण पर भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने फिलहाल सहमति नहीं दी है। संस्थान की ओर से किए गए अध्ययन में इस क्षेत्र में बाघ सहित कई वन्यजीवों की सक्रिय मौजूदगी दर्ज की गई है। रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंप दी गई है, जिसके बाद अब परियोजना के स्वरूप में बदलाव की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

वन्यजीवों की मौजूदगी बनी मुख्य वजह
पीपलकोटी से पशुलोक बैराज तक लगभग 22 किलोमीटर लंबा यह मार्ग राजाजी टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरता है। जानकारी के अनुसार, अध्ययन के दौरान कई स्थानों पर वन्यजीवों की गतिविधियां सामने आईं। सूत्रों के मुताबिक कैमरा ट्रैप में बाघ और अन्य वन्य प्राणियों की तस्वीरें भी दर्ज हुई हैं। इसी आधार पर WII ने सड़क को मौजूदा स्वरूप में चौड़ा किए जाने पर अपनी असहमति जताई है।
पहले अध्ययन के बाद ही लिया गया फैसला
इस सड़क के विस्तार का प्रस्ताव वर्ष 2025 में राज्य वन्यजीव बोर्ड के समक्ष रखा गया था। बोर्ड ने निर्णय लिया था कि किसी भी अंतिम मंजूरी से पहले भारतीय वन्यजीव संस्थान से विस्तृत अध्ययन कराया जाए। अध्ययन पूरा होने के बाद संस्थान ने अपनी रिपोर्ट संबंधित विभाग को सौंप दी है, जिसके निष्कर्षों के आधार पर अब आगे की रणनीति तय की जाएगी।
आधुनिक विकल्पों पर बढ़ा जोर
सड़क चौड़ीकरण के बजाय अब एलिवेटेड रोड और अंडरपास जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने इन विकल्पों की व्यवहारिकता और पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करने के लिए फिर से WII से सहयोग मांगा है। उद्देश्य यह है कि क्षेत्र में यातायात की सुविधा बेहतर हो, लेकिन वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन और जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर न्यूनतम असर पड़े।
हजारों पेड़ों की कटाई टल सकती है
विभागीय प्रस्ताव के अनुसार यदि सड़क को पारंपरिक तरीके से चौड़ा किया जाता, तो करीब 3,813 पेड़ों की कटाई करनी पड़ती। पर्यावरणीय दृष्टि से यह एक बड़ी चुनौती मानी जा रही थी। अब यदि एलिवेटेड रोड या अन्य वैकल्पिक ढांचा अपनाया जाता है, तो पेड़ों की कटाई काफी कम हो सकती है और वन क्षेत्र को होने वाला नुकसान भी सीमित रहेगा।
अधिकारियों ने दी परियोजना की जानकारी
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि नए विकल्पों की संभावनाओं का आकलन करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान से दोबारा अध्ययन का अनुरोध किया गया है। वहीं, अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह के अनुसार एलिवेटेड रोड बनने की स्थिति में मार्ग की लंबाई लगभग दो किलोमीटर तक कम हो सकती है। इससे यातायात सुगम होगा, पेड़ों का संरक्षण भी संभव होगा और वन्यजीवों की आवाजाही पर भी कम प्रभाव पड़ेगा।
संतुलित विकास पर रहेगा जोर
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता है। अंतिम निर्णय अध्ययन रिपोर्ट और तकनीकी सुझावों के आधार पर लिया जाएगा, ताकि क्षेत्र की पारिस्थितिकी सुरक्षित रहे और स्थानीय लोगों को बेहतर सड़क सुविधा भी मिल सके।