झारखण्ड

ChildSafety – जमुई में जीआरपी की सतर्कता से सुरक्षित परिजनों तक पहुंचे चार नाबालिग…

ChildSafety – जमुई रेल थाना (जीआरपी) की त्वरित कार्रवाई और मानवीय दृष्टिकोण के चलते मंगलवार देर रात चार नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया। संदिग्ध हालात में मिले इन बच्चों को स्कॉट टीम ने ट्रेन संख्या 3207 जसीडीह–पटना एक्सप्रेस से बरामद किया। बच्चों की उम्र और उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए जीआरपी ने बिना देरी किए उन्हें संरक्षण में लिया और पूरी प्रक्रिया को संवेदनशील तरीके से आगे बढ़ाया।

नियमित जांच के दौरान ट्रेन में मिले नाबालिग


मंगलवार रात जमुई रेलवे स्टेशन पर नियमित गश्त के दौरान जीआरपी की स्कॉट टीम की नजर चार बच्चों पर पड़ी, जो अकेले और घबराए हुए दिखाई दे रहे थे। पूछताछ करने पर बच्चों के जवाब असमंजस भरे लगे, जिससे पुलिस को संदेह हुआ। टीम ने तत्काल स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बच्चों को ट्रेन से उतारा और सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उनसे बातचीत शुरू की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की कम उम्र और असहज व्यवहार यह संकेत दे रहा था कि वे किसी परेशानी में घर से दूर निकले हैं।

प्राथमिक पूछताछ में सामने आई बच्चों की आपबीती


शांत माहौल में की गई प्रारंभिक पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे झारखंड के गोड्डा जिले के पुरियाहाट क्षेत्र स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई करते हैं। बच्चों के अनुसार, स्कूल परिसर में उन पर चोरी का आरोप लगाया गया था। इसी दौरान कथित रूप से उनके साथ मारपीट भी हुई, जिससे वे मानसिक रूप से आहत हो गए। डर और तनाव की स्थिति में बच्चों ने स्कूल छोड़ने का फैसला किया और बिना किसी को बताए ट्रेन में सवार हो गए।

विद्यालय प्रबंधन का पक्ष भी आया सामने


पूछताछ के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि विद्यालय प्रबंधन की ओर से बच्चों के अचानक स्कूल से गायब होने की बात कही गई है। हालांकि, इस पूरे मामले में जीआरपी ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को सुनने की आवश्यकता बताई। पुलिस का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी आरोप या विवाद की जांच संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर की जाएगी।

जीआरपी की संवेदनशील भूमिका और मानवीय पहल


मामले की गंभीरता को देखते हुए जमुई रेल थाना अध्यक्ष मनोज कुमार देव स्वयं बच्चों से मिले। उन्होंने धैर्यपूर्वक बच्चों से बातचीत की, उनकी पहचान की पुष्टि कराई और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके बाद नियमानुसार बच्चों के परिजनों की जानकारी जुटाई गई। जीआरपी ने बिना किसी दबाव के बच्चों की काउंसलिंग की, ताकि वे अपनी बात खुलकर रख सकें।

परिजनों को दी गई सूचना, बढ़ी राहत


बच्चों की पहचान होते ही जीआरपी की ओर से उनके परिजनों को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही परिजन जमुई रेल थाना पहुंचे। अपने बच्चों के सुरक्षित मिलने की खबर सुनकर परिजनों ने राहत महसूस की। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और आश्वस्त किया कि बच्चों के साथ किसी प्रकार की अनुचित घटना नहीं हुई है।

कानूनी प्रक्रिया के बाद सुरक्षित सुपुर्दगी


सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताओं और पहचान सत्यापन के बाद बुधवार सुबह चारों नाबालिगों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस दौरान जीआरपी ने बाल संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन किया। बच्चों को सकुशल देखकर परिजनों ने जमुई जीआरपी की तत्परता और संवेदनशीलता की सराहना की।

बाल सुरक्षा को लेकर सतर्कता का संदेश


यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि रेलवे परिसर में सतर्कता और संवेदनशीलता कितनी आवश्यक है। जीआरपी की सक्रियता से न केवल बच्चों को सुरक्षित माहौल मिला, बल्कि समय रहते उन्हें उनके परिवार से भी मिलाया जा सका। पुलिस अधिकारियों ने आम यात्रियों से भी अपील की है कि यदि कहीं कोई नाबालिग संदिग्ध या असहाय स्थिति में दिखे, तो तुरंत रेलवे पुलिस या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।

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