NuclearTreaty – परमाणु सम्मेलन बिना सहमति खत्म, ईरान पर बढ़ा दबाव
NuclearTreaty –संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित परमाणु अप्रसार संधि समीक्षा सम्मेलन 2026 किसी साझा निष्कर्ष के बिना समाप्त हो गया। कई दिनों तक चली बैठकों और कूटनीतिक चर्चाओं के बावजूद सदस्य देश अंतिम सहमति तक नहीं पहुंच सके। सम्मेलन के समापन के बाद अमेरिका ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कुछ देशों पर अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है।

सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हुआ जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका-ईरान संबंध पहले से अधिक संवेदनशील बने हुए हैं। इसी कारण वैश्विक स्तर पर परमाणु सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर बहस तेज हो गई है।
ईरान की परमाणु गतिविधियों पर अमेरिका की आपत्ति
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सम्मेलन के बाद जारी बयान में कहा कि ईरान की परमाणु गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई हैं। अमेरिका का आरोप है कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहा और संवर्धित परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है।
अमेरिका ने कहा कि अगर वैश्विक परमाणु सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना है, तो सदस्य देशों को इस विषय पर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाना होगा। वाशिंगटन का मानना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले देशों के प्रति नरमी भविष्य में बड़े संकट को जन्म दे सकती है।
लगातार तीसरी बार नहीं बनी सहमति
सम्मेलन के अध्यक्ष डो हंग विएत ने पुष्टि की कि सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने रहे, जिसके कारण अंतिम दस्तावेज तैयार नहीं हो सका। यह लगातार तीसरी बार है जब पांच वर्षीय समीक्षा सम्मेलन किसी ठोस सहमति के बिना समाप्त हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से परमाणु अप्रसार संधि को मजबूत करने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। बदलते वैश्विक समीकरणों, क्षेत्रीय संघर्षों और बड़े देशों के बीच बढ़ते अविश्वास ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण मामलों की प्रमुख इजुमी नाकामित्सु ने सम्मेलन के निष्कर्षहीन समाप्त होने को गंभीर संकेत बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में परमाणु हथियारों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद और सहयोग पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आने वाले वर्षों में इस दिशा में नई पहल नहीं हुई तो वैश्विक परमाणु नियंत्रण व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। अगला समीक्षा सम्मेलन अब वर्ष 2031 में प्रस्तावित है।
लेबनान और हिजबुल्ला पर भी अमेरिकी बयान
परमाणु मुद्दे के साथ-साथ अमेरिका ने लेबनान की स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि हिजबुल्ला की गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
अमेरिका का आरोप है कि संगठन युद्धविराम प्रयासों को कमजोर कर रहा है और दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। वाशिंगटन ने स्पष्ट किया कि वह लेबनान की निर्वाचित सरकार का समर्थन जारी रखेगा और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयासों में सहयोग करेगा।
वैश्विक कूटनीति पर बढ़ा दबाव
सम्मेलन के निष्कर्षहीन रहने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक दबाव बढ़ गया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि ईरान, पश्चिम एशिया और परमाणु सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आने वाले महीनों में नई वार्ताएं हो सकती हैं।
हालांकि फिलहाल किसी बड़े समाधान के संकेत स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन वैश्विक शक्तियां लगातार बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले समय में अमेरिका, ईरान और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।