उत्तराखण्ड

River Rafting Safety Training 2026: अब राफ्टिंग गाइड बनेंगे ‘लाइफ सेवर’, जानें उत्तराखंड पर्यटन विभाग का नया मास्टरप्लान

River Rafting Safety Training 2026: उत्तराखंड की पावन नदियों, विशेषकर गंगा में राफ्टिंग का आनंद लेने वाले पर्यटकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने अब राफ्टिंग गाइडों की तकनीकी दक्षता और सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा करने का निर्णय लिया है। सचिवालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान (Tourism Secretary Decision on Rafting) के तहत यह अनिवार्य कर दिया गया है कि हर गाइड को अब तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण से गुजरना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी आपातकालीन स्थिति में पर्यटकों की जान बचाना और तत्काल सहायता प्रदान करना है।

River Rafting Safety Training 2026
River Rafting Safety Training 2026

गाइडों को मिलेगी प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर की ट्रेनिंग

अक्सर राफ्टिंग के दौरान अचानक चोट लगने या पानी में डूबने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में समय रहते चिकित्सा सहायता न मिलना घातक साबित हो सकता है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए (First Aid and CPR Training for Guides) कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से गाइडों को जीवन रक्षक तकनीकों में माहिर बनाया जाएगा, जिससे वे अस्पताल पहुँचने से पहले ही मौके पर घायल व्यक्ति की स्थिति को संभाल सकें और किसी अनहोनी को टाल सकें।

गाइडों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा में 10 साल का इजाफा

बैठक में राफ्टिंग एसोसिएशन की एक लंबे समय से लंबित मांग पर भी मुहर लगा दी गई है। सचिव पर्यटन धीराज गर्ब्याल ने राफ्टिंग गाइडों की अधिकतम आयु सीमा को 50 वर्ष से बढ़ाकर (Rafting Guide Age Limit Extension) 60 वर्ष करने पर अपनी सहमति दे दी है। इस फैसले से उन अनुभवी गाइडों को बड़ी राहत मिलेगी जो शारीरिक रूप से फिट होने के बावजूद उम्र के मापदंड के कारण काम छोड़ने को मजबूर थे। अब उनका वर्षों का अनुभव नदी की लहरों पर पर्यटकों की सुरक्षा में काम आएगा।

900 गाइडों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण

पर्यटन विभाग ने प्रदेश भर के लगभग 900 राफ्टिंग गाइडों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। इस वृहद अभियान को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चलाने के लिए (Heanifill Center USA Training Agency) संस्था के साथ सहयोग किया जा रहा है। यूएसए की यह विशेषज्ञ संस्था चरणबद्ध तरीके से गाइडों को आधुनिक फर्स्ट एड तकनीकों की बारीकियां सिखाएगी। यह प्रशिक्षण केवल किताबी न होकर पूरी तरह से व्यावहारिक होगा, ताकि गाइड वास्तविक परिस्थितियों में बिना घबराए काम कर सकें।

नए साल के पहले हफ्ते से शुरू होगा महाअभियान

सुरक्षा के इस नए अध्याय की शुरुआत जनवरी 2026 के प्रथम सप्ताह से होने जा रही है। पर्यटन सचिव ने निर्देश दिए हैं कि (Rafting Training Schedule 2026) का पालन कड़ाई से किया जाए ताकि सीजन शुरू होने से पहले सभी गाइड तकनीकी रूप से सुदृढ़ हो सकें। ट्रेनिंग प्रोग्राम के पूरा होने के बाद ही गाइडों को नए लाइसेंस या रिन्यूअल की प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे पूरे प्रदेश में राफ्टिंग का एक सुरक्षित ईकोसिस्टम तैयार हो सके।

राफ्टिंग पिकअप प्वाइंट और नदी तटों का होगा कायाकल्प

प्रशिक्षण के अलावा बैठक में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विस्तार से चर्चा की गई। राफ्टिंग एसोसिएशन ने मांग की थी कि मुख्य मार्ग से लेकर (Rafting Pickup Point Improvement) तक के रास्तों को सुधारा जाए। पर्यटन सचिव ने आश्वस्त किया है कि पिकअप पॉइंट्स की मरम्मत और नदी तटों पर आधुनिक कैंपों की स्थापना के कार्यों में तेजी लाई जाएगी। इससे पर्यटकों को वाहन से उतरने और राफ्ट तक पहुँचने में होने वाली असुविधा से निजात मिलेगी।

गंगा की वहन क्षमता का होगा फिर से वैज्ञानिक आकलन

पर्यावरण और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गंगा नदी की वहन क्षमता यानी ‘कैरिंग कैपेसिटी’ का पुनः आकलन करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। (Ganga River Carrying Capacity Assessment) के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि नदी में एक समय में कितनी राफ्ट्स का संचालन सुरक्षित है। इसके साथ ही, नदी के किनारे और राफ्टिंग रूट पर एम्बुलेंस की स्थायी व्यवस्था करने का आश्वासन भी दिया गया है, ताकि किसी भी गंभीर हादसे की स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम किया जा सके।

मसूरी विंटर लाइन कार्निवल का बढ़ेगा रोमांच

बैठक के दौरान पर्यटन सचिव ने आगामी 24 दिसंबर से शुरू होने वाले (Mussoorie Winter Line Carnival) की तैयारियों का भी जिक्र किया। इस उत्सव के दौरान उत्तराखंड और हिमाचल के लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जो पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होगा। पर्यटन विभाग का मानना है कि राफ्टिंग को सुरक्षित बनाकर और इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से देवभूमि में पर्यटकों की संख्या और उनके अनुभव की गुणवत्ता में बड़ा सुधार लाया जा सकता है।

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