राष्ट्रीय

Women Reservation – मोदी से मुलाकात में महिला आरक्षण पर स्पष्ट रुख रखने की कांग्रेस ने की अपील

Women Reservation के मुद्दे पर संसद के मॉनसून सत्र के बीच सियासी हलचल बढ़ गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के आठ सांसद सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाले हैं। इस बैठक में महाराष्ट्र से जुड़े कई अहम विषयों को उठाए जाने की संभावना है। इसी बीच कांग्रेस ने अपने महा विकास अघाड़ी सहयोगी दल से आग्रह किया है कि वह प्रधानमंत्री के सामने महिला आरक्षण कानून को लेकर इंडिया गठबंधन का रुख स्पष्ट रूप से रखे।

कांग्रेस ने एनसीपी प्रतिनिधिमंडल से क्या कहा

कांग्रेस नेता और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव सचिन सावंत ने एनसीपी (शरद गुट) के सांसदों से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री के सामने 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की मांग रखें। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि महिला आरक्षण कानून को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखा जाना चाहिए।

सावंत के मुताबिक, इंडिया गठबंधन की स्थिति इस मामले में स्पष्ट है और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि एनसीपी सांसद प्रधानमंत्री से होने वाली मुलाकात में इस मांग को मजबूती से सामने रखें, ताकि विपक्ष की साझा स्थिति भी स्पष्ट रहे।

महाराष्ट्र के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से होगी चर्चा

एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने इससे पहले बताया था कि पार्टी के आठ सांसद प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। प्रस्तावित बैठक में महाराष्ट्र से संबंधित कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

सुप्रिया सुले के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल किसानों की आत्महत्या, पानी की समस्या और तेजी से बढ़ते शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों को प्रधानमंत्री के सामने रखेगा। उनका कहना था कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में इन विषयों को लेकर लगातार समस्याएं सामने आ रही हैं और केंद्र सरकार का ध्यान इन पर आकर्षित करना जरूरी है।

परिसीमन को लेकर विपक्ष की आपत्ति

महिला आरक्षण के साथ परिसीमन को जोड़ने का मुद्दा विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है। विपक्षी दल महिला आरक्षण कानून के उद्देश्य का समर्थन करते हैं, लेकिन उनका तर्क है कि इसके क्रियान्वयन को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं होगा।

16 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और महिला आरक्षण कानून को लागू करने की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, विधेयक को संसद में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का आवश्यक दो-तिहाई समर्थन नहीं मिल सका। बजट सत्र की विस्तारित अवधि में भी यह संवैधानिक संशोधन पारित नहीं हो पाया।

महिला आरक्षण कानून पर विपक्ष की मांग

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया को पूर्व शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए। विपक्ष के मुताबिक, महिलाओं को संसद में आरक्षण देने का प्रावधान जल्द लागू किया जा सकता है और इसके लिए प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

परिसीमन में लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े ढांचे का नए सिरे से निर्धारण किया जाता है। इसी वजह से इसके साथ महिला आरक्षण को जोड़ने का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। एनसीपी सांसदों की प्रधानमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक ऐसे समय हो रही है, जब संसद में इस विषय को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं।

विपक्षी एकता पर कांग्रेस का जोर

सचिन सावंत ने परिसीमन के मुद्दे पर विपक्षी दलों की एकजुटता को महत्वपूर्ण बताया है। कांग्रेस चाहती है कि इंडिया गठबंधन से जुड़े दल महिला आरक्षण के तत्काल क्रियान्वयन और परिसीमन से उसे अलग रखने की मांग पर अपनी स्थिति स्पष्ट रखें।

अब प्रधानमंत्री मोदी के साथ एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के सांसदों की बैठक में महाराष्ट्र के स्थानीय मुद्दों के साथ महिला आरक्षण और परिसीमन का विषय किस तरह उठता है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। बैठक के बाद सामने आने वाले रुख से विपक्ष और सरकार के बीच इस मुद्दे पर आगे की बहस की दिशा भी स्पष्ट हो सकती है।

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