ExecutiveOfficer – निकायों में प्रभारी ईओ की नई तैनाती पर उठे नियमों से जुड़े सवाल
ExecutiveOfficer- उत्तराखंड के शहरी विकास निदेशालय ने प्रदेश के कई नगर निकायों में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) की जिम्मेदारी सौंपी है। इन नियुक्तियों में क्लर्क, कर निरीक्षक, कर कर्मचारी, लेखा कर्मी और सफाई निरीक्षक जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को अलग-अलग नगर निकायों में प्रभारी ईओ बनाया गया है। विभाग का तर्क है कि नियमित अधिशासी अधिकारियों की कमी के कारण यह व्यवस्था लागू की गई है।

रिक्त पदों के कारण किया गया जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण
शहरी विकास विभाग के अनुसार राज्य में अधिशासी अधिकारियों के कई पद खाली हैं। उपलब्ध अधिकारियों में से अनेक की तैनाती नगर निगमों में होने के कारण छोटे नगर निकायों में प्रशासनिक रिक्तता पैदा हो गई। इसी स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने विभिन्न श्रेणियों के अनुभवी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से प्रभारी ईओ का दायित्व सौंपने का निर्णय लिया। इन आदेशों पर अपर सचिव एवं निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी के हस्ताक्षर से अधिसूचना जारी की गई है।
कई नगर निकायों में बदली प्रशासनिक जिम्मेदारी
जारी आदेशों के तहत प्रदेश के विभिन्न नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में अलग-अलग कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें लेखा कर्मियों, कर निरीक्षकों, कर अधीक्षकों, लिपिकों और सफाई निरीक्षकों को महुआखेड़ागंज, लंढौरा, गौचर, टिहरी, नानकमत्ता, बाजपुर, पिरान कलियर, ढंडेरा, तपोवन, कालाढूंगी, देवप्रयाग, ऊखीमठ, जसपुर, उत्तरकाशी, चमियाला, लालकुआं और बड़कोट सहित कई निकायों में प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाया गया है।
नियमों को लेकर उठ रहे हैं सवाल
इन नियुक्तियों के बाद प्रशासनिक और सेवा नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि अधिशासी अधिकारी का पद सामान्यतः पदोन्नति या लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के जरिए भरा जाता है। विशेष रूप से सफाई निरीक्षक जैसे पदों से अधिशासी अधिकारी के पद तक नियमित पदोन्नति का प्रावधान नहीं होने के कारण इस व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पूर्व में लागू दिशा-निर्देशों में भी प्रभारी ईओ की जिम्मेदारी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जाने का उल्लेख मिलता रहा है।
हाईकोर्ट के निर्देशों का भी हो रहा उल्लेख
इस विषय में नैनीताल हाईकोर्ट के एक पूर्व आदेश का भी हवाला दिया जा रहा है। मई 2025 में न्यायालय ने नगर निकायों में कर्मचारियों की कमी और लंबे समय से चल रही प्रभारी व्यवस्था पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। याचिका में दावा किया गया था कि नियमित नियुक्तियों के अभाव में कई महत्वपूर्ण पद अतिरिक्त प्रभार के सहारे संचालित हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य और नागरिक सेवाओं पर असर पड़ सकता है। अदालत ने इस संबंध में शहरी विकास सचिव को निर्धारित समय सीमा में निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
विभाग ने नियुक्तियों को बताया अस्थायी समाधान
शहरी विकास विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था नई नहीं है, बल्कि पहले भी ऐसे अधिकारी प्रभारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। विभाग के अनुसार नियमित अधिशासी अधिकारियों के पर्याप्त पद भरे जाने तक प्रशासनिक कामकाज बाधित न हो, इसलिए अनुभवी कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल कार्य संचालन की निरंतरता बना