DefenceCorridor – छोटे हथियारों के निर्माण में तेजी से उभर रहा उत्तर प्रदेश
DefenceCorridor – उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विस्तार के साथ रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में करीब 29 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन परियोजनाओं के तहत कई निजी कंपनियां पिस्टल, रिवॉल्वर, कार्बाइन और अन्य छोटे हथियारों के निर्माण की दिशा में काम कर रही हैं, जबकि कुछ इकाइयों में उत्पादन भी शुरू हो चुका है।

सरकारी इकाइयों से आगे बढ़ा रक्षा उद्योग
एक समय छोटे हथियारों का निर्माण मुख्य रूप से कानपुर की सरकारी आयुध इकाइयों तक सीमित था, लेकिन अब यह गतिविधि हरदोई, अलीगढ़ और झांसी जैसे जिलों तक फैल चुकी है। इन क्षेत्रों में निजी निवेश बढ़ने से राज्य में स्मॉल आर्म्स निर्माण का व्यापक नेटवर्क विकसित हो रहा है। रक्षा उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि सरकारी और निजी क्षेत्र की संयुक्त भागीदारी ने उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
निजी निवेश से मिला नया विस्तार
रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियों की भागीदारी ने भी उत्तर प्रदेश की स्थिति को मजबूत किया है। इंग्लैंड की हथियार निर्माता कंपनी Webley & Scott ने भारतीय साझेदार के साथ राज्य में अपनी उत्पादन इकाई स्थापित की, जिसके बाद अन्य कंपनियों ने भी यहां निवेश करना शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप राज्य में आधुनिक तकनीक आधारित छोटे हथियारों के निर्माण को गति मिली है और कई नई परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं।
कई जिलों में स्थापित हो रही नई उत्पादन इकाइयां
हरदोई, अलीगढ़ और झांसी में कई निजी कंपनियां स्मॉल आर्म्स निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं पर कार्य कर रही हैं। इनमें Webley & Scott India, Verwin Defence Private Limited, Shan Arms Industries, Sekington Industries और Delta Combat Systems जैसी कंपनियां शामिल हैं। विभिन्न परियोजनाओं में करोड़ों रुपये का निवेश प्रस्तावित या स्वीकृत किया गया है। इन इकाइयों के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
मजबूत औद्योगिक आधार का मिल रहा लाभ
उत्तर प्रदेश में पहले से मौजूद रक्षा उत्पादन अवसंरचना भी इस विकास में अहम भूमिका निभा रही है। कानपुर में स्थित Small Arms Factory और Advanced Weapons and Equipment India Limited सेना तथा सुरक्षा बलों के लिए छोटे हथियारों का निर्माण करती हैं। इसके अलावा राज्य में सात आयुध कारखाने, चार HAL इकाइयां और अन्य रक्षा उत्पादन प्रतिष्ठान मौजूद हैं, जो प्रदेश को मजबूत औद्योगिक आधार प्रदान करते हैं।
अन्य राज्यों की तुलना में अलग है फोकस
देश के अन्य राज्यों में भी रक्षा उत्पादन से जुड़ी परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन उनका प्रमुख फोकस अलग-अलग क्षेत्रों पर है। तमिलनाडु में एयरोस्पेस, मिसाइल और उन्नत रक्षा प्रणालियों पर कार्य हो रहा है, जबकि मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सरकारी आयुध निर्माण इकाइयां लंबे समय से सक्रिय हैं। तेलंगाना में निजी क्षेत्र मुख्य रूप से मिसाइल, ड्रोन और एयरोस्पेस तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश छोटे हथियारों के निर्माण में तेजी से अपनी अलग पहचान स्थापित करता दिखाई दे रहा है।