उत्तर प्रदेश

CyberFraud – विदेशी नागरिकों से ठगी मामले में तीन प्रमुख आरोपी कोलकाता से गिरफ्तार

CyberFraud – लखनऊ में संचालित कथित फर्जी कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले के मुख्य आरोपी विनीत धर्मेंद्र वशिष्ठ, उसके सहयोगी नायकर जयराज उर्फ चार्ल्स और रिंकी दास गुप्ता को कोलकाता में गिरफ्तार किया गया है। लखनऊ पुलिस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से तीनों को हिरासत में लिया है और उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विनीत पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर हुई कार्रवाई

जांच अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद से तीनों आरोपी लगातार अपने मोबाइल फोन बंद रखे हुए थे। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और उनके करीबी लोगों की गतिविधियों के आधार पर संभावित ठिकानों का पता लगाया। कोलकाता में गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास कोई मोबाइल या ऐसा सामान नहीं मिला, जिससे तत्काल डिजिटल साक्ष्य प्राप्त हो सकें। हालांकि, समिट बिल्डिंग से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इनके नाम मामले में शामिल किए गए हैं। मंगलवार को तीनों को अदालत में पेश किया जाएगा।

विदेश से संचालित नेटवर्क की जांच

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भारत में कथित कॉल सेंटर का संचालन करने की जिम्मेदारी विनीत को विदेश में बैठे गिरोह के सरगना की ओर से दी गई थी। पुलिस के अनुसार, विनीत और नायकर मूल रूप से अहमदाबाद के निवासी हैं, जबकि रिंकी दास गुप्ता कोलकाता की रहने वाली है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं।

ऑपरेशन मैनेजर से भी होगी पूछताछ

इस मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम से दोबारा पूछताछ की तैयारी है। पुलिस ने दोनों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में आवेदन किया है। अधिकारियों का मानना है कि इनसे पूछताछ के दौरान धन के प्रवाह, बैंकिंग लेनदेन और गिरोह की कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

कई शहरों में जारी है आरोपियों की तलाश

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार तीनों आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर देश के विभिन्न शहरों में छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियां इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और संभावित सहयोगियों की पहचान करने में जुटी हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इसी नेटवर्क से जुड़ी कोई अन्य कंपनी या फर्म भी अलग नाम से संचालित हो रही थी। कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और कथित विदेशी दस्तावेजों का सत्यापन भी कराया जा रहा है।

वायरल वीडियो की भी हो रही जांच

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कॉल सेंटर के अंदर का बताया गया एक वीडियो तेजी से साझा किया गया था। वीडियो के साथ यह दावा किया गया कि उसमें कुछ पुलिस अधिकारी दिखाई दे रहे हैं। जांच में यह वीडियो संबंधित कॉल सेंटर का नहीं पाया गया। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि भ्रामक वीडियो किसने और किस उद्देश्य से प्रसारित किया।

कोलकाता कनेक्शन की जांच जारी

जांच के दौरान यह पहलू भी सामने आया है कि इससे पहले कोलकाता में इसी तरह के एक कथित फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ था, जहां विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जाता था। अब पुलिस दोनों मामलों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि दोनों नेटवर्क की कार्यप्रणाली और संचालन में समानता साबित होती है, तो पूरे मामले की जांच और व्यापक हो सकती है।

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